नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा)मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने सूचना के अधिकार अधिनियम (अधिनियम) के लागू होने के दो दशक बीत जाने के बावजूद इसका निरंतर अनुपालन नहीं होने पर चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की कमियों को उजागर किया है।
गोयल ने कहा कि उन्हें उसके वैधानिक कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
सीआईसी गोयल ने 16 जनवरी को हिंदी में जारी एक आदेश में टिप्पणी की कि आरटीआई अधिनियम के लागू होने के 20 वर्षों के बावजूद, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) में सार्वजनिक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकरण अपनी कानूनी जिम्मेदारियों के प्रति ‘सतर्क नहीं’ हैं। उन्होंने इसे एक ‘गंभीर मुद्दा’ बताया।
सीआईसी ने ये टिप्पणियां 15 मई, 2025 को दायर एक आरटीआई आवेदन से संबंधित दूसरी अपील का निस्तारण करते हुए की, जिसमें पश्चिमी दिल्ली के एक निजी अस्पताल की निरीक्षण रिपोर्ट, की गई कार्रवाई और पंजीकरण स्थिति से संबंधित विवरण मांगे गए थे।
आयोग ने रेखांकित किया कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा निर्धारित समय के भीतर कोई जवाब नहीं दिया गया, न ही प्रथम अपीलीय प्राधिकारी की ओर से कोई आदेश पारित किया गया, जिसके कारण आवेदक को सीआईसी का रुख करना पड़ा।
आदेश में कहा गया कि अंततः संबंधित जानकारी सात जनवरी, 2026 को उपलब्ध कराई गई, यानी लगभग आठ महीने बाद, और वह भी आयोग द्वारा नोटिस जारी करने के बाद। आयोग ने नोटिस में इसे ‘अत्यधिक देरी’ और आरटीआई अधिनियम के तहत वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में विफलता करार दिया था।
भाषा धीरज माधव
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