जद(यू) सांसद ने बिहार के हितों की खातिर फरक्का जल संधि का नवीनीकरण नहीं करने की मांग की

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जद(यू) सांसद ने बिहार के हितों की खातिर फरक्का जल संधि का नवीनीकरण नहीं करने की मांग की

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 07:59 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 07:59 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बृहस्पतिवार को जनता दल (यूनाइटेड) के एक सदस्य ने बांग्लादेश के साथ 1996 की फरक्का जल-बंटवारा संधि को उसके वर्तमान स्वरूप में नवीनीकृत नहीं करने का सरकार से आग्रह किया।

जद(यू) सांसद ने कहा कि किसी भी नयी व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले बिहार की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और विकास जरूरतों पर गौर किया जाना चाहिए।

राज्यसभा में विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाते हुए जद(यू) के संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में हस्ताक्षरित फरक्का जल संधि की वैधता इस साल के आखिर में समाप्त होने वाली है और इसका नवीनीकरण गंगा नदी के किनारे बसे राज्यों, विशेष रूप से बिहार की जल की आवश्यकताओं के व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन के बिना नहीं किया जाना चाहिए।

जद (यू) सदस्य ने इसे ‘‘राष्ट्रीय हित का मुद्दा’’ बताते हुए कहा कि संधि के बारे में कोई भी निर्णय लेने से पहले बिहार के हितों की पर्याप्त रूप से रक्षा की जानी चाहिए।

झा ने कहा कि फरक्का बराज का निर्माण हुगली नदी में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करने और कोलकाता बंदरगाह की जरूरतों के लिए किया गया था, लेकिन बिहार पिछले कई दशकों से गंगा जल की अपर्याप्त उपलब्धता से प्रभावित है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण बिहार के कई जिलों के भूजल स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे पेयजल, और सिंचाई के लिए पानी की कमी हो रही है।

जद(यू) सांसद ने कहा कि राज्य की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त गंगा जल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 2050 तक बिहार को अतिरिक्त 2,000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संधि का उसके मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण नहीं किया जाए और नयी व्यवस्था विकसित करने से पहले सभी संबंधित राज्यों की जरूरतों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘जब तक बिहार के हितों को पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं किया जाता, संधि का नवीनीकरण राज्य के दीर्घकालिक हित में नहीं होगा।’’

भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का जल-बंटवारा समझौता 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला है।

भाषा अविनाश सुभाष

सुभाष