रीजीजू ने राहुल को तीन दिन में दूसरी बार किया फोन, परिसीमन विधेयक पर सहयोग मांगा

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रीजीजू ने राहुल को तीन दिन में दूसरी बार किया फोन, परिसीमन विधेयक पर सहयोग मांगा

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 07:41 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 07:41 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से टेलीफोन पर बातचीत की और महिला आरक्षण एवं परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के लिए समर्थन मांगा, लेकिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने इस प्रस्तावित विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

पिछले कुछ दिनों में यह दूसरा अवसर है जब रीजीजू ने नेता प्रतिपक्ष से फोन पर बातचीत की। संसदीय कार्य मंत्री ने सदन के सुचारु संचालन के लिए पिछले 10 दिन में राहुल गांधी से दो बार मुलाकात भी की है।

रीजीजू ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘राहुल गांधी के साथ मेरी सार्थक बातचीत हुई। मैंने कुछ विशिष्ट मुद्दों पर उनसे अनुरोध किया और अन्य विषयों पर भी चर्चा की। हमें उम्मीद है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ लगातार संवाद और समन्वय जारी रहेगा।’’

सूत्रों के अनुसार, जब रीजीजू ने महिला आरक्षण एवं परिसीमन विधेयक को पारित कराने के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगा तो राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को इस प्रस्तावित विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।

सूत्रों ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री ने हालांकि इस संबंध में कोई आश्वासन नहीं दिया।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार महिला आरक्षण एवं परिसीमन विधेयक पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है।

रीजीजू ने राहुल गांधी से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं, लेकिन दुश्मन नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए राष्ट्र हित में हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए। हालांकि, बाहर यह धारणा बनाई जा रही है कि वे संसद को बिल्कुल नहीं चलने देना चाहते हैं, लेकिन आखिरकार इसका नुकसान किसे होगा?’’

विपक्ष द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग किये जाने के मुद्दे पर रीजीजू ने कहा कि गृह मंत्री सुबह से शाम तक संसद में मौजूद रहकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘स्वाभाविक है कि जिस मंत्री का विधेयक सदन में विचाराधीन होता है, वह सदन में मौजूद रहता है।’’

सरकार मौजूदा मानसून सत्र में, वर्ष 2029 से पहले संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने के उद्देश्य से संविधान संशोधन विधेयक को फिर से लाने का नये सिरे से प्रयास कर रही है। लगभग चार महीने पहले, लोकसभा में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण ऐसा प्रयास सफल नहीं हो सका था।

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मुद्दे पर कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों से भी संपर्क कर रही है। साथ ही, सरकार ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व समेत अन्य विपक्षी नेताओं से भी प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को दोबारा पेश करने पर उनकी राय जानने की योजना बनाई है।

सूत्रों ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री ने प्रस्तावित विधेयक पर राजग के सहयोगी दलों की भी राय जानी है। इस विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने के उद्देश्य से लोकसभा की सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है।

इस विधेयक के जरिये महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है।

सूत्रों ने बताया कि सरकार की ओर से दोनों सदनों में समन्वय की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग विधेयक को कुछ संशोधनों के साथ दोबारा पेश कराने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि दक्षिणी राज्यों की आशंकाओं का समाधान किया जा सके। सरकार मानसून सत्र के समापन (13 अगस्त) से पहले, अगले सप्ताह यह विधेयक पेश करने की कोशिश कर रही है। सत्र के पांच कार्य दिवस शेष हैं।

सरकार के एक पदाधिकारी ने कहा कि यदि सरकार परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करना चाहती है तो यह मौजूदा सत्र में ही किया जाएगा। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के बाद विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना से भी इनकार किया। रीजीजू ने भी विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना को खारिज कर दिया।

इससे पहले, सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पारित कराने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार ऐसा हुआ था कि संसद में कोई विधेयक पारित नहीं हो सका।

सूत्रों के अनुसार, सरकार नए विधेयक में यह प्रावधान भी जोड़ सकती है कि प्रत्येक राज्य में मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी।

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