झारखंड: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया; पानी की बौछारें छोड़ीं; आंसू गैस के गोले दागे

झारखंड: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया; पानी की बौछारें छोड़ीं; आंसू गैस के गोले दागे

झारखंड: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया; पानी की बौछारें छोड़ीं; आंसू गैस के गोले दागे
Modified Date: August 10, 2026 / 04:46 pm IST
Published Date: August 10, 2026 4:46 pm IST

रांची, 10 अगस्त (भाषा) प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अवरोधक तोड़े और राज्य विधानसभा तक पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उनपर पानी की बौछारें कीं, आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया।

कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में वे घायल हो गए। यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब प्रदर्शनकारी नए विधानसभा परिसर की ओर जाने वाले मार्ग पर जगन्नाथपुर मंदिर के पास अंतिम अवरोधक तक पहुंचे थे। वर्तमान में झारखंड विधानसभा का सत्र चल रहा है।

पीयूष कुमार सोनी नामक एक प्रदर्शनकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘लाठीचार्ज बहुत बर्बर था। हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने हम पर लाठियां बरसाईं। ये सिर्फ हमें शारीरिक चोट पहुंचा सकते हैं, हमारी सोच को नहीं दबा सकते।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘कई छात्राओं को भी चोटें आईं। पुलिस ने हमारे सिर, हाथों, चेहरे हर जगह वार किये।’’

हजारीबाग जिले से आए विक्रम कुमार ने दावा किया कि उनके सिर पर चोट आई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार हमारे साथ जो कुछ भी कर रही है वह ठीक नहीं है। हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे फिर आपकी पुलिस हम पर लाठियां क्यों बरसा रही थी।’’

सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 51वां जन्मदिन है और इसी दिन प्रदर्शनकारियों ने पुराने विधानसभा भवन के बाहर से सुबह करीब साढ़े 10 बजे मार्च शुरू किया। छात्रों ने प्रदर्शन के 17वें दिन अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।

इस मुद्दे पर नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) नेता देवेंद्रनाथ महतो एंबुलेंस में बैठकर इस मार्च में शामिल हुए। इस दौरान वह पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर लिये हुए नजर आए।

विधानसभा तक मार्च के रास्ते पर कंटीले तारों के अवरोधक लगाए जाने का विरोध करते हुए महतो ने कहा कि छात्रों के साथ हुए अन्याय को लेकर उनमें गुस्सा पनप रहा है।

प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तिरंगा और तख्तियां लिये हुए थे, जिसपर ‘‘जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करें या सीबीआई जांच कराएं’’, ‘‘जेएसएससी पर छापेमारी करने से क्यों बच रही है सीआईडी?’’ और ‘‘निष्पक्ष जांच कराएं, सच सामने लाएं’’ जैसे नारे लिखे थे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों युवकों और युवतियों ने एक के बाद एक अवरोधक तोड़ दिए।

मार्च के दौरान तिरंगा लहराते हुए जब प्रदर्शनकारी नए विधानसभा परिसर की ओर जाने वाले मार्ग पर जगन्नाथपुर मंदिर के पास अंतिम अवरोधक तक पहुंचे तब पुलिस ने उनपर पानी की बौछारें कीं। पुलिस द्वारा पानी की बौछारें करते देख प्रदर्शनकारी नाचने लगे। लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो स्थिति बिगड़ गई और पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज किया।

प्रदर्शनकारी विधानसभा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर थे और भीड़ को रोकने में नाकाम रहने पर पुलिस ने आंसू गैस के कई गोले दागे।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘अगर हम विधानसभा तक नहीं पहुंच सकते तो हमारी आवाज उन तक जरूर पहुंचनी चाहिए। हम सरकार से नहीं डरते जो हमारे साथ देशद्रोहियों जैसा बर्ताव कर रही है। हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।’’

आंदोलन की अगुवाई कर रहे ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ ने कहा कि उसने असामाजिक तत्वों को मार्च में शामिल होने से रोकने के लिए लगभग 500 स्वयंसेवकों को तैनात किया है।

जेएलकेएम के विधायक जयराम महतो इस मुद्दे पर एक दिन के अनशन के बाद मार्च में शामिल हुए। उन्होंने कहा, ‘‘छात्र शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं; पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश क्यों कर रही है? उनके हाथों में लाठियां नहीं हैं।’’

वहीं, राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए इस प्रदर्शन को ‘‘हाईजैक’’ कर लिया है।

उन्होंने विधानसभा के बाहर पत्रकारों से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार द्वारा उनकी 95 प्रतिशत मांगें पूरी किए जाने के बावजूद छात्र आंदोलन कर रहे हैं।

इससे पहले, विधानसभा में विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कुमार ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन अब छात्रों का आंदोलन न रहकर ‘‘भाजपा की बुरी मानसिकता और राजनीतिक मंसूबों’’ से प्रेरित हो गया है।

अधिकारियों ने बताया कि निषेधाज्ञा लागू करने के अलावा लगभग चार किलोमीटर लंबे पूरे रास्ते पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

उन्होंने बताया कि त्वरित कार्य बल (आरएएफ), भारतीय रिजर्व बटालियन, जिला पुलिस और त्वरित कार्रवाई बल (क्यूआरटी) के 1,500 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है।

सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की लेकिन गतिरोध खत्म नहीं हो सका। बातचीत के आखिरी दौर के बाद सरकार ने कहा कि उसने प्रदर्शनकारियों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली हैं।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार ने उन 13 परीक्षाओं में से केवल तीन को रद्द करने पर सहमति जताई है, जिन्हें वे (प्रदर्शनकारी) रद्द करने की मांग कर रहे थे।

प्रदर्शनकारी झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी छात्र 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से या राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से कराई जाए।

भाषा सुरभि सुरेश

सुरेश


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