मणिपुर में हिंसा प्रभावित परिवारों को पुनर्वास लाभ न मिलने के दावों की जांच करे समिति : न्यायालय
मणिपुर में हिंसा प्रभावित परिवारों को पुनर्वास लाभ न मिलने के दावों की जांच करे समिति : न्यायालय
नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपनी बनाई एक समिति से उन दावों की जांच करने को कहा, जिनके मुताबिक 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से प्रभावित करीब 24,000 परिवारों को अब तक सरकारी पुनर्वास और कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं मिला है।
न्यायालय ने मणिपुर और असम सरकारों तथा अन्य लोगों से यह भी कहा कि वे हिंसा से जुड़े केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के मामलों की सुनवाई के लिए अलग-अलग दो विशेष अधीनस्थ अदालत बनाने पर विचार करें।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस समेत कई वकीलों की दलीलों पर ध्यान दिया, जिनमें कहा गया था कि प्रभावित कई आदिवासियों को अब तक पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है।
पीठ उन लोगों के पुनर्वास के मामले की सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने हिंसा के दौरान अपने घर और आजीविका के साधन खो दिए थे।
न्यायालय ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का संज्ञान लिया। इसने देखा कि पहचान किए गए लगभग 7,000 लाभार्थियों में से 4,000 से ज्यादा लाभार्थियों को उनके घरों के पुनर्निर्माण के लिए धनराशि जारी की गई है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारी योजना के तहत कच्चे घर के लिए पांच लाख रुपये और अर्द्ध-पक्के या पक्के घर के लिए सात लाख रुपये दिए जाते हैं।
पीठ ने न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्त मखीजा की दलीलों पर ध्यान देते हुए कहा कि हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत अब तक 12,000 से ज्यादा घरों को मंजूरी दी जा चुकी है।
पीठ ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि अस्थायी आश्रय गृह बनाए गए हैं और पक्के घरों के लिए 885 चिह्नित लाभार्थियों को 51.95 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
इसके अलावा, जिन परिवारों के घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे, उन्हें प्रति परिवार एक लाख रुपये दिए गए हैं।
कुछ प्रभावित परिवारों की ओर से हालांकि यह बताया गया कि लगभग 24,000 परिवारों को अभी तक लाभ नहीं मिला है, जिसकी पुष्टि जमीनी स्तर पर की जा सकती है।
पीठ ने कहा कि उसे बताया गया है कि इन परिवारों की जानकारी तीन-सदस्यीय समिति को सौंप दी गई है।
सीजेआई ने कहा, “अगर ऐसा है, तो हम समिति से अनुरोध करते हैं कि वह कथित तौर पर प्रभावित परिवारों की जानकारी की जांच और पुष्टि करे तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के बारे में एक नोट भेजे, जिसका इस न्यायालय ने 27 मई, 2026 के अपने आदेश में उल्लेख किया था।”
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों की संपत्तियों से जुड़ी अर्जी न्यायमूर्ति मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति को भेजी जाए।
गोंजाल्वेस ने कहा कि अदालत के सामने उन 20 चर्चों की एक अलग सूची भी पेश की गई, जहां कथित तौर पर अतिक्रमण हुआ है।
न्यायालय ने कहा कि न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति संबंधित दस्तावेजों और भूमि रिकॉर्ड के आधार पर आवेदनों पर विचार करेगी और दावों की पुष्टि करेगी।
पीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन संपत्तियों पर दावे किए गए हैं, उनपर आगे कोई अतिक्रमण न हो।
समिति इस मामले में न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट पेश करेगी।
मणिपुर में तीन मई 2023 को जातीय हिंसा भड़क उठी। यह हिंसा पहाड़ी जिलों में आयोजित ‘जनजातीय एकजुटता मार्च’ के बाद शुरू हुई, जो बहुसंख्यक मेइती समुदाय की ओर से ‘अनुसूचित जनजाति’ का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में निकाला गया था।
हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक 200 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं, सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और हज़ारों विस्थापित हुए हैं।
भाषा प्रशांत सुरेश
सुरेश

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