नयी कर प्रणाली के तहत छूट से इनकार को न्यायाधीश ने चुनौती दी

नयी कर प्रणाली के तहत छूट से इनकार को न्यायाधीश ने चुनौती दी

नयी कर प्रणाली के तहत छूट से इनकार को न्यायाधीश ने चुनौती दी
Modified Date: July 20, 2026 / 10:30 pm IST
Published Date: July 20, 2026 10:30 pm IST

प्रयागराज, 20 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने नयी कर प्रणाली के तहत अपनी कुल आय से कानूनी भत्ते को अलग किए जाने (छूट दिए जाने) से इनकार को चुनौती देते हुए इस उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने राज्य सरकार को इस याचिका से अवगत कराने को कहा और सुनवाई की अगली तिथि 28 जुलाई तय की।

न्यायमूर्ति जैन ने अपनी याचिका में नयी कर प्रणाली का विकल्प अपनाने के बाद उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1954 के तहत उल्लिखित कानूनी भत्ते अपनी कुल आय से घटाए जाने से इनकार किए जाने को चुनौती दी है।

इस अधिनियम की धारा 22डी के तहत एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के आधिकारिक आवास, आवागमन की सुविधाओं, आतिथ्य भत्ता और अवकाश यात्रा रियायत को उनकी कुल आय से अलग रखा जाता है।

याचिका के मुताबिक, जब न्यायमूर्ति जैन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई कर प्रणाली के तहत अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने का प्रयास किया तो आयकर पोर्टल ने उन्हें 9.85 लाख रुपये का छूट का दावा करने की अनुमति कथित तौर पर नहीं दी और कहा कि ये लाभ केवल पुरानी कर प्रणाली के तहत उपलब्ध थे।

न्यायमूर्ति जैन ने इसके बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के पास प्रत्यावेदन भेजा जिसके जवाब में उन्हें 12 सितंबर, 2025 के सीबीडीटी कार्यालय ज्ञापन का संदर्भ देते हुए एक पत्र मिला।

इस ज्ञापन में कहा गया कि नई कर प्रणाली का विकल्प अपनाने वाले करदाता इस तरह की छूट का दावा नहीं कर सकते क्योंकि नई कर प्रणाली में पहले से ही उदार कर स्लैब, कर की कम दरें और अधिक छूट उपलब्ध कराई गई है। यह छूट देने का अर्थ दोहरा लाभ देने के समान होगा।

भाषा सं राजेंद्र

धीरज

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