मंडी (हिमाचल प्रदेश), 15 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह ही सेवाभाव की भावना से काम करना चाहिए, क्योंकि लोग न्याय और राहत की उम्मीद लेकर अदालतों में आते हैं।
मंडी के न्यायिक अदालत परिसर की आधारशिला रखने के बाद एक विधि साक्षरता शिविर को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सुविधाओं में वृद्धि के साथ न्यायिक प्रणाली की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि चर्चा अक्सर मौलिक अधिकारों पर केंद्रित रहती है, लेकिन मौलिक कर्तव्य भी संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित मंडी न्यायिक अदालत परिसर का निर्माण 9.6 हेक्टेयर क्षेत्र में 152 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। परिसर में चार ब्लॉक होंगे, जो न्यायाधीशों, वकीलों और आम लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।
कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को न्याय और अधिकार उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने लोक अदालतों के माध्यम से लगभग 5.5 लाख लंबित मामलों का निपटारा किया है।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि आज की चर्चा न्याय की पहुंच हर व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि न्याय केवल अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अधिकारों के प्रति जागरूकता, कानूनी सहायता की उपलब्धता और समय पर मदद सुनिश्चित करना भी शामिल है।
भाषा
प्रचेता दिलीप
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