(फोटो सहित)
नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने सभी नागरिकों के लिए सुलभ, किफायती और समय पर न्याय की आवश्यकता पर रविवार को जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि सभी के लिए उपलब्ध अधिकार है।
उन्होंने विधि मंत्रालय की ‘टेली-लॉ’ पहल के तहत न्याय तक समावेशी, प्रौद्योगिकी-आधारित पहुंच का भी आह्वान किया। यहां इस पहल पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने हाल में हुए कानूनी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि नए आपराधिक कानूनों में बदलाव, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और दक्षता में सुधार करके, अधिक नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव किया गया है।
उन्होंने शासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और टेली-मेडिसिन जैसी पहल का उदाहरण दिया और ‘टेली-लॉ’ पहल को कानूनी सेवाओं के लोकतंत्रीकरण का एक शक्तिशाली माध्यम बताया।
राधाकृष्णन ने कहा कि मुकदमे से पहले कानूनी सलाह विवादों को शीघ्र सुलझाने, अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने और अदालतों पर बोझ कम करने में सहायक हो सकती है।
उपराष्ट्रपति ने भाषाई समावेशन के महत्व पर जोर देते हुए संविधान को कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताया और समझ और भागीदारी को बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषाओं में कानूनी परामर्श प्रदान करने का आह्वान किया।
उन्होंने कानूनी सेवाओं को अंतिम छोर विशेष रूप से महिलाओं, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित प्रयासों का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने न्याय तक पहुंच बढ़ाने में जमीनी स्तर पर योगदान देने वाले अर्द्ध-कानूनी स्वयंसेवकों, सामान्य सेवा केंद्रों, वकीलों और अन्य हितधारकों की सराहना की।
भाषा आशीष नरेश
नरेश