कन्नूर: एनेस्थीसिया के बाद बच्चे की मौत, परिजनों की जांच में तेजी की मांग

कन्नूर: एनेस्थीसिया के बाद बच्चे की मौत, परिजनों की जांच में तेजी की मांग

कन्नूर: एनेस्थीसिया के बाद बच्चे की मौत, परिजनों की जांच में तेजी की मांग
Modified Date: July 25, 2026 / 10:42 am IST
Published Date: July 25, 2026 10:42 am IST

कन्नूर (केरल), 25 जुलाई (भाषा) कन्नूर के एक निजी अस्पताल में होंठ की चोट पर टांके लगाने के लिए कथित तौर पर एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) दिए जाने के बाद डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में उसके माता-पिता ने अधिकारियों से जांच में तेजी लाने की मांग की है।

एरामम निवासी देवांश शौरिया को पांच जुलाई को खेलते समय होंठ में चोट लग गई थी। उसे पय्यनूर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने एनेस्थीसिया देकर घाव पर टांके लगाने की सलाह दी।

परिवार की शिकायत के अनुसार, एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद बच्चा बेहोश हो गया। इसके बाद उसे कन्नूर के एक अन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अंजलि पोडुवल के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

बच्चे के पिता सूरज ने संवाददाताओं से कहा कि घटना के बाद चिकित्सा लापरवाही के आरोपों की जांच के लिए जिला स्तरीय चिकित्सकीय समिति का गठन किया गया था।

उन्होंने दावा किया, ‘‘समिति में पांच सदस्य थे। इनमें से तीन ने माना कि डॉक्टरों की ओर से लापरवाही हुई थी। एक सदस्य ने लापरवाही से इनकार किया, जबकि एक अन्य ने तटस्थ राय दी।’’

उन्होंने कहा कि परिवार अब भी यह जानना चाहता है कि आखिर यह घटना कैसे हुई।

सूरज ने कहा, ‘‘मेडिकल रिपोर्ट अब राज्य स्तरीय समिति को भेज दी गई है, जिसे इस मामले में उचित कार्रवाई करनी है।’’

पिछले सप्ताह सूरज ने केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला से मुलाकात कर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक बार फिर गृह मंत्री से अनुरोध करता हूं कि जांच में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। जब तक मुझे न्याय नहीं मिल जाता, मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगा। सरकार से मेरी बार-बार यही अपील है कि मामले की जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कराई जाए।’’

सूरज ने बताया कि वह परिवार की चिंताओं से मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को भी अवगत कराने के लिए उनसे मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं।

परिवार की मांग है कि बच्चे का इलाज करने वाले अन्य दो डॉक्टरों को भी इस मामले में आरोपी बनाया जाए।

पय्यनूर थाने के अधिकारियों ने बताया कि चूंकि मामला चिकित्सा लापरवाही के आरोपों से जुड़ा है, इसलिए आगे की कार्रवाई के लिए विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं, घटना के बाद अस्पताल ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद बच्चे को हृदयाघात हुआ था।

अस्पताल का कहना है कि बच्चे को तुरंत वेंटिलेटर (जीवनरक्षक प्रणाली) पर रखा गया और इसके बाद उसे दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।

भाषा गोला शोभना

शोभना


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