कानपुर (उप्र), 24 फरवरी (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर के 17 साल के अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि अगर 6.5 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो कानपुर और प्रयागराज के कुछ हिस्सों को भारी नुकसान हो सकता है।
आईआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. निहार रंजन पात्रा के नेतृत्व में किया गया शोध, गंगा नदी बेल्ट के साथ जलोढ़ मिट्टी की उच्च द्रवीकरण क्षमता पर प्रकाश डालता है, ये एक ऐसा कारक है जो तेजी से जमीन के हिलने को बढ़ा सकता है और इमारतों को अस्थिर कर सकता है।
संस्थान की अनुसंधान टीम ने गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार से लगभग दो दशकों में एकत्र किए गए मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण किया।
कानपुर और प्रयागराज में 43 स्थानों से नमूने लिए गए, जिसमें चुनिंदा क्षेत्रों में कानपुर और प्रयागराज में दो स्थानों पर 30 से 40 मीटर तक और 80 मीटर गहराई तक बोरहोल ड्रिल किए गए, जो अन्य जगहों पर उपयोग किए जाने वाले सामान्य 10-30 मीटर से कहीं अधिक गहरे थे।
कानपुर और प्रयागराज के कई हिस्सों में, ऊपरी 8-10 मीटर मिट्टी ढीली, रेतीली और पानी-संतृप्त है, जो भूकंप के तेज झटकों के दौरान जोखिम भरा हो सकता है।
पात्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि द्रवीकरण तब होता है जब तीव्र झटकों के कारण जलजमाव वाली मिट्टी अस्थायी रूप से अपनी ताकत खो देती है और तरल की तरह व्यवहार करने लगती है।
उन्होंने बताया कि इससे इमारतें झुक सकती हैं, सड़कें और रेलवे पटरी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और भूमिगत प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंच सकता हैं। उन्होंने कहा कि नदी के किनारे और निचले इलाके विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
विस्तृत मिट्टी विश्लेषण के लिए पहचाने गए इलाकों में बिठूर, मंधना, पनकी, बर्रा, चकेरी, रतनलाल नगर, नारामाओ और आईआईटी-कानपुर के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। वाराणसी के कुछ हिस्सों में भी मिट्टी की ऐसी स्थिति पायी गई है।
भारत के भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र के अनुसार, कानपुर और प्रयागराज के खंड जोन-3 और 4 के अंतर्गत आते हैं, जो मध्यम से उच्च जोखिम को दर्शाते हैं।
अध्ययन में तेजी से शहरीकरण, मिट्टी की विस्तृत जांच के बिना ऊंची इमारतों का निर्माण और बिल्डिंग संहिता के कमजोर कार्यान्वयन को प्रमुख चिंताओं के रूप में दर्शाया गया है।
पात्रा ने निर्माण से पहले अनिवार्य मिट्टी परीक्षण, भूकंपीय डिजाइन कोड का सख्ती से पालन करने तथा अस्पतालों, स्कूलों और सरकारी कार्यालयों जैसे जोखिम भरे सार्वजनिक भवनों के पुन: संयोजन की सिफारिश की है।
भाषा सं जफर शफीक
शफीक