धर्म आधारित आरक्षण जारी नहीं रखने का विवेकपूर्ण फैसला किया: कर्नाटक सरकार ने न्यायालय से कहा

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धर्म आधारित आरक्षण जारी नहीं रखने का विवेकपूर्ण फैसला किया: कर्नाटक सरकार ने न्यायालय से कहा

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  • Publish Date - April 26, 2023 / 09:21 PM IST,
    Updated On - April 26, 2023 / 09:21 PM IST

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि उसने केवल धर्म के आधार पर आरक्षण जारी नहीं रखने का विवेकपूर्ण निर्णय लिया है क्योंकि यह असंवैधानिक है और इसलिए मुस्लिम समुदाय के लिए चार प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को समाप्त किया गया।

राज्य सरकार ने 27 मार्च के उसके दो आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना जवाब दायर किया। याचिकाओं में अन्य पिछड़ी जातियों की 2बी श्रेणी में मुसलमानों के लिए प्रदत्त चार प्रतिशत आरक्षण को निरस्त करने और सरकारी शिक्षण संस्थानों में दाखिले तथा नौकरियों में वोक्कालिगा और लिंगायत का आरक्षण बढ़ाने के मौजूदा सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है।

कर्नाटक सरकार ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने धर्म के आधार पर आरक्षण को जारी नहीं रखने का एक विवेकपूर्ण निर्णय लिया क्योंकि यह असंवैधानिक है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 से 16 के विपरीत है।’’

उसने कहा, ‘‘इसलिए, 27 मार्च, 2023 के दो आदेशों के तहत, मुस्लिम समुदाय के लिए प्रदत्त चार प्रतिशत आरक्षण हटा दिया गया और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) योजना के तहत आरक्षण का लाभ लेने की अनुमति दी गई, जो कि 10 प्रतिशत है।’’

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा था कि कर्नाटक में मुसलमानों को चार फीसदी आरक्षण देने का पूर्ववर्ती सरकार का फैसला नौ मई तक कायम रहेगा।

शीर्ष अदालत कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव से एक दिन पहले इस मामले से संबंधित विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई करेगी। चुनाव परिणाम 13 मई को घोषित होंगे।

अपने जवाब में, राज्य सरकार ने कहा कि केवल धर्म के आधार पर आरक्षण भी सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और सामाजिक न्याय की अवधारणा का उद्देश्य उन लोगों की रक्षा करना है जो समाज के भीतर वंचित और भेदभाव से पीड़ित हैं।

कर्नाटक सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के मुसलमानों के लिए चार फीसदी कोटा समाप्त करते हुए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की दो नयी श्रेणियों की घोषणा की थी। ओबीसी मुसलमानों के चार फीसदी कोटे को वोक्कलिगा और लिंगायत समुदायों के बीच बांट दिया गया है। यही नहीं, आरक्षण के लिए पात्र मुसलमानों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के तहत वर्गीकृत कर दिया गया है।

राज्य सरकार के फैसले के बाद अब वहां आरक्षण की सीमा करीब 57 फीसदी हो गई है।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश