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बेंगलुरु, चार जून (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार जनता की शिकायतों के निवारण के लिए एक अलग सचिवालय स्थापित करेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपने-अपने विभागों के लिए 15 दिनों के भीतर कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें दबाव में न आने और ईमानदारी, विवेक और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ काम करने का निर्देश दिया।
पदभार ग्रहण करने के एक दिन बाद, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने राज्य के शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की।
शिवकुमार ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘जनता की शिकायतों के निवारण के लिए एक अलग सचिवालय स्थापित किया जाएगा और राज्य भर से बेंगलुरु आने वाले लोगों, जिनमें विरोध प्रदर्शन या आंदोलन करने वाले भी शामिल हैं, की शिकायतों, मांगों या मुद्दों को सुनने के लिए एक मंत्री नियुक्त किया जाएगा। ऐसे अलग सचिवालय की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हर दिन दो या तीन समूह यहां विरोध प्रदर्शन करने आते हैं। किसी को उनसे मिलना होगा और उनकी समस्याओं को समझना होगा। यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि उनकी मांगें वैध हैं या अवैध। अधिकारियों को उनसे मिलना चाहिए, तथ्यों को सुनना चाहिए और उनके मुद्दों को समझना चाहिए। इसलिए, एक अलग सचिवालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।’’
बैठक में उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर, मंत्री रामलिंगा रेड्डी, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, पुलिस महानिदेशक एम ए सलीम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
शिवकुमार ने कहा कि नयी सरकार ने आज से अपना काम शुरू कर दिया है और अधिकारियों को सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में सूचित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जाति या धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के प्रभाव को बर्दाश्त नहीं करेगी और उन्होंने अधिकारियों से दबाव के आगे न झुकने का आग्रह किया।
भाषा शफीक माधव
माधव