श्रीनगर, 22 मार्च (भाषा) कश्मीर के कुछ इलाकों में लोगों ने युद्धग्रस्त ईरान के राहत कोष के लिए नकद, सोना और तांबे के बर्तनों समेत कई चीजें दान की हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
दान के लिए आभार व्यक्त करते हुए, ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दयालुता का यह कार्य ‘कभी नहीं भुलाया जाएगा।’’
ईद के अगले दिन, घाटी के शिया बहुल इलाकों में रविवार को युवा ईरान में पश्चिम एशिया युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए घर-घर गये।
रैनावारी निवासी एजाज अहमद ने चंदा जुटाये जाने के दौरान कहा, ‘‘इजराइल की यहूदी सरकार और उसके समर्थकों द्वारा ईरान पर थोपे गए इस अवैध युद्ध से भारी तबाही मची है। सभ्य दुनिया कम से कम इतना तो कर ही सकती है कि ईरान के पीड़ित लोगों को सहायता भेजे।’’
अधिकारियों ने बताया कि दान अभियान में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों समेत समाज के सभी वर्गों के लोगों ने भाग लिया।
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से महिलाओं ने आगे आकर उदारतापूर्वक सोने के आभूषण, तांबे के बर्तन और अन्य मूल्यवान घरेलू सामान दान किए हैं तथा कुछ परिवारों ने पशुधन भी दान किया है।
अधिकारियों के अनुसार, बच्चों ने भी अपनी बचत और जेब खर्च दान करके अपना योगदान दिया।
यह दान विशेष रूप से बडगाम और बारामूला में एकत्र किया गया है, जहां अच्छी खासी शिया आबादी है।
उन्होंने बताया कि एकत्रित दान राशि को ईरानी दूतावास समेत सरकारी राहत संगठनों के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा।
दान की तस्वीरें साझा करते हुए, ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “कृतज्ञता से भरे हृदय से, हम कश्मीर के दयालु लोगों का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने मानवीय सहायता और हार्दिक एकजुटता के माध्यम से ईरान के लोगों का साथ दिया; इस दयालुता को हम कभी नहीं भूलेंगे।”
दूतावास ने लिखा, “हम आपकी दयालुता और मानवता को कभी नहीं भूलेंगे। धन्यवाद, भारत।”
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश