नई दिल्ली: चुनावी सरगर्मी के बीच केरल से एक दुखद खबर सामने आई है। खबर है कि केरल के पूर्व वित्त मंत्री और केरल कांग्रेस एम के अध्यक्ष केएम मणि का मंगलवार को एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। मंगलवार को ही सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। मणि 86 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से सीओपीडी से पीड़ित थे और लगातार इसका उपचार करवा रहे थे। बता दें मणि प्रदेश की कोट्टायम लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार हैं जहां 23 अप्रैल को चुनाव होना है।
<blockquote class=”twitter-tweet” data-lang=”en”><p lang=”en” dir=”ltr”>Kerala Congress (M) chairman and former Kerala Finance Minister KM Mani passes away in Ernakulam. More details awaited <a href=”https://t.co/UynJU6j41o”>pic.twitter.com/UynJU6j41o</a></p>— ANI (@ANI) <a href=”https://twitter.com/ANI/status/1115583501192126466?ref_src=twsrc%5Etfw”>April 9, 2019</a></blockquote>
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मणि का जन्म 30 जनवरी 1933 को मरंगट्टुपिल्ली के एक साधारण परिवार में हुआ था। वे पेशे से एक वकिल थे, इसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। पत्नी कांग्रेस नेता पीटी चाको की बहन थीं और बेटे होजे के मणि भी राजनीति में हैं। बेटा दो बार कोट्टयम से सांसद चुने गए थे।
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राजनीति में मणि फर्श से अर्श तक गए हैं। वार्ड के स्तर पर राजनीति में आए और 1960 में कोट्टयम के कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष बने। कहते हैं कि उनके करियर को इस बात से खूब मदद मिली कि उनकी शादी पीटी चाको की बहन से हुई थी। पीटी चाको तब केरल में बड़े नेता थे। लेकिन मणि सही मायने में आगे तभी बढ़े जब पीटी चाको की छांव से बाहर निकले।
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साल 1964 था। पीटी चाको केरल के गृह मंत्री थे। उन पर इल्ज़ाम लगा कि वे अपनी पार्टी की एक कार्यकर्ता के साथ छुट्टियां बिताने निकले थे। हमारे यहां नेताओं की निजी ज़िंदगी में बहुत रुचि ली जाती है। तो इसे एक मुद्दा बना लिया गया और पीटी चाको को इस्तीफा देना पड़ा। कुछ समय बाद चाको का देहांत हो गया। इस पर केरल में कांग्रेस दो फाड़ हो गई। चाको के समर्थकों ने ‘केरला प्रदेश कांग्रेस समुधारणा समिति’ नाम से अलग पार्टी बना ली। इसी का नाम बाद में बदल कर ‘केरला कांग्रेस’ कर दिया गया।
मणि कांग्रेस में ही बने रहे, लेकिन उन्हें धक्का तब पहुंचा जब 1965 के चुनावों में उन्हें कांग्रेस से टिकट नहीं मिला। मणि तब तक रुके जब तक उन्हें चुनाव लड़ने के लिए एक फाइनेंसर नहीं मिल गया। उसकी व्यवस्था होते ही वे केरला कांग्रेस में चले गए। पार्टी ने उन्हें पलई से टिकट भी दे दिया, तब पाला को पलई कहते थे। चुनाव हुए और मणि जीत गए।
कांग्रेस के इतिहास में कई बंटवारे हुए हैं। इनमें से एक इमरजेंसी के बाद 1978 में हुआ। इंदिरा कांग्रेस एक तरफ रही और दूसरी तरफ देवराज उर्स की कांग्रेस (यू) थी। जिसमें ज़्यादातर दक्षिण के कांग्रेसी नेता थे। इन दोनों धड़ों के सहारे केरल की सीएच मोहम्मद कोया की सरकार चल रही थी। दिसंबर 1979 में कांग्रेस (यू) के ए के एंटनी ने कोया सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। प्लान था कि के एम मणि को मुख्यमंत्री बनाया जाए, लेकिन इससे पहले कि मणि सरकार बनाने का दावा पेश करते, गवर्नर जोथी वेंकटचालम ने विधानसभा भंग कर दी। मणि मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए। वे मुख्यमंत्री बनने के इतने करीब दोबारा कभी नहीं पहुंचे।