कोच्चि, नौ जुलाई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने अमेरिका स्थित स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकी कंपनी कोरोहेल्थ और नौकरी से निकाले गए उसके कर्मचारियों को औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत सुलह का प्रयास करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति गोपीनाथ पी. ने यह निर्देश एर्नाकुलम के जिला श्रम अधिकारी के उस पत्र को चुनौती देने वाली कंपनी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें कंपनी को केरल में अपना कामकाज बंद करने और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया था।
कंपनी ने अदालत को बताया कि अपने नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण उसे केरल में संचालन बंद करना पड़ा और इस वजह से लगभग 800 कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसने छंटनी का मुआवजा कर्मचारियों के खातों में पहले ही अंतरित कर दिया है।
इसने दलील दी कि श्रम अधिकारी औद्योगिक विवाद में सुलह का प्रयास तो कर सकते हैं, लेकिन वे अंतरिम रूप से कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखने का निर्देश नहीं दे सकते।
कंपनी ने यह भी कहा कि श्रम अधिकारी के पत्र के बाद उसे कुछ श्रमिक संगठनों के व्यापक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, उसने सुलह प्रक्रिया में सहयोग करने की सहमति भी जताई।
राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता जाजू बाबू ने अदालत को बताया कि नौकरी से निकाले गए लगभग 800 कर्मचारियों में अधिकांश महिलाएं हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सुलह का प्रयास करना राज्य का सामाजिक दायित्व है और इसके लिए 10 जुलाई को श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है।
बाबू ने कहा कि कंपनी से बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि महाधिवक्ता का यह तर्क सही है कि राज्य का सुलह कराने का सामाजिक दायित्व है, ‘‘विशेष रूप से तब, जब याचिकाकर्ता कंपनी के कामकाज बंद करने से इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के रोजगार पर संकट उत्पन्न हो।’’
अदालत ने कहा, ‘‘जिला श्रम अधिकारी के पत्र को किसी आदेश के रूप में नहीं, बल्कि उनके द्वारा शुरू की गई सुलह प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। दोनों पक्ष औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत सुलह का प्रयास करेंगे।’’
कोरोहेल्थ ने कोच्चि स्थित अपने कार्यालय में नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को प्रवेश देने से मंगलवार को इनकार कर दिया था जिसके बाद श्रम विभाग के अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
भाषा
खारी रंजन
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