तिरुवनंतपुरम, 25 अगस्त (भाषा) केरल सहित पूरी दुनिया में बसे मलयाली समुदाय के लोग बुधवार को ‘तिरुवोनम’ पर्व मनाने की तैयारियों में जुटे हैं। त्योहार की पूर्व संध्या यानी ‘उथराडम’ के दिन पौराणिक असुर राजा महाबली के स्वागत के लिए घरों में आखिरी दौर की खरीदारी और तैयारियां देखने को मिलीं।
मलयालम कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष 10 दिवसीय ओणम उत्सव की शुरुआत 16 अगस्त को ‘अथम’ के दिन हुई थी, जिसका समापन 26 अगस्त को ‘तिरुवोनम’ के साथ होगा।
ओणम के अवसर पर केरल के बाजारों, सड़कों और घरों में जबरदस्त चहल-पहल देखी गई। लोग त्योहार की खुशियों के लिए सब्जियां, फल, फूल, किराना सामान और नए कपड़े खरीदने के लिए दुकानों पर उमड़ पड़े।
‘उथराडम’ को ओणम का पहला दिन माना जाता है। पारंपरिक रूप से इस दिन राजा महाबली के स्वागत की अंतिम तैयारियां की जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि राजा महाबली तिरुवोनम के दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं।
दस दिवसीय ओणम उत्सव अब अपने चरम पर पहुंच रहा है। परिवार भव्य भोज (सद्या) की व्यवस्था करने, आंगन को ‘पुक्कलम’ (फूलों की रंगोली) से सजाने और अतिथियों का स्वागत करने की तैयारियों में व्यस्त हैं।
पूरे राज्य में ‘उथराडप्पचिल’ – यानी ओणम की खरीदारी की अंतिम समय की होड़ – साफ दिखाई दी। कपड़ा दुकानों, सब्जी मंडियों, फूल बाजारों, सुपरमार्केट और सड़क किनारे के विक्रेताओं के पास भारी भीड़ उमड़ी।
लोग गेंदा, गुलदाउदी और चमेली जैसे फूलों की खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंचे, ताकि त्योहार की बड़ी फूलों की रंगोली बनाई जा सके। इसके साथ ही, पारंपरिक ओणम ‘सद्या’ (भोज) के लिए केले के पत्तों, सब्जियों और अन्य सामग्रियों की भी भारी मांग रही।
कई परिवारों के लिए ‘उथराडम’ रसोई में तैयारियों का भी दिन होता है। तिरुवोनम के भव्य भोज के लिए सब्जियों को धोकर काटा जाता है, जबकि केले के चिप्स, शर्करा उप्पेरी (गुड़ में लिपटे केले के चिप्स) और अचार पहले से तैयार कर लिए जाते हैं।
फसल कटाई के उत्सव के रूप में मनाए जाने वाले ओणम से पहले परिवार के सदस्यों और प्रियजनों के लिए नए वस्त्र यानी ‘ओणक्कोडी’ खरीदना एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
यद्यपि ऑनलाइन खरीदारी अब काफी लोकप्रिय हो गई है, फिर भी कई लोग खुद दुकानों पर जाकर खरीदारी करना ही पसंद कर रहे हैं।
हिंदू पौराणिक कथाओं से जुड़ा ओणम का यह पर्व धर्म, जाति और सामाजिक दायरे से परे जाकर सभी को परंपरा और उल्लास के एक सूत्र में बांधता है। इस दौरान मुख्य रूप से फूलों की रंगोली सजाई जाती है और केले के पत्तों पर भव्य ओणम ‘सद्या’ परोसा जाता है।
भाषा सुमित माधव
माधव