खरगे का ‘शुद्धीकरण’ मामले में नड्डा को पत्र, प्राथमिकी के लिए धामी को निर्देशित करने का आग्रह

खरगे का ‘शुद्धीकरण’ मामले में नड्डा को पत्र, प्राथमिकी के लिए धामी को निर्देशित करने का आग्रह

खरगे का ‘शुद्धीकरण’ मामले में नड्डा को पत्र, प्राथमिकी के लिए धामी को निर्देशित करने का आग्रह
Modified Date: September 3, 2026 / 10:08 am IST
Published Date: September 3, 2026 10:08 am IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा से आग्रह किया है कि वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को निर्देशित कर ‘शुद्धीकरण’ की घटना में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराना सुनिश्चित करें।

खरगे ने नड्डा को पत्र लिखकर यह भी कहा कि 24 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गत आठ अगस्त को उत्तराखंड में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की एक सभा हुई थी और इसके बाद कुछ लोगों ने सभास्थल का कथित तौर पर शुद्धीकरण किया था।

कांग्रेस का आरोप है कि ऐसा करने वाले भाजपा और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोग हैं। भाजपा ने हालांकि आरोप से इनकार किया है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दो सितंबर की तिथि वाले पत्र में कहा, ‘‘राज्यसभा में दिए गए आश्वासन के आलोक में आप उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देशित करते हुए यह सुनिश्चित करें कि हल्द्वानी में मेरी जनसभा के बाद रामलीला मैदान पर शुद्धीकरण की इस घटना में संलिप्त व्यक्तियों और संगठनों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाये।’’

खरगे ने कहा कि हल्द्वानी में कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धीकरण’ का मुद्दा 13 अगस्त, 2026 को राज्यसभा में उठाया गया था और उस दौरान नड्डा ने सदन में खड़े होकर कहा था कि ‘‘जो भी बात हुई है, उसकी जांच जरूर होगी’’ और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खरगे ने पत्र में नड्डा द्वारा सदन में दिए गए आश्वासन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने यह भी कहा था, ‘‘इस तरह के कृत्य का भारतीय जनता पार्टी कभी भी समर्थन नहीं करती है। मैं इसकी भर्त्सना करता हूं और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी इसे गहराई से देखेंगे।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि घटना के 24 दिन बीत जाने के बाद भी संबंधित संगठन और व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकरण की सबसे आपत्तिजनक बात यह थी कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान के उस स्थल पर, जहां मैंने रैली को संबोधित किया, वहां पर भारत के संविधान की भावना और मानवीय मूल्यों के विपरीत शुद्धीकरण कराया गया।’’

खरगे ने कहा कि ‘शुद्धीकरण’ की ऐसी प्रक्रिया को आमतौर पर छुआछूत से जोड़ा जाता है।

उन्होंने 1927 के ‘महाड़ आंदोलन’ का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा तालाब से पानी पीने के बाद जातीय दंभ से भरे लोगों ने ‘‘108 घड़े गोमूत्र और गोबर डाल कर मंत्रोच्चार के साथ शुद्धीकरण किया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मंत्रोच्चार या हवन करने से शुद्धीकरण की जातिवादी प्रक्रिया पावन नहीं हो जाती है।’’

खरगे ने कहा कि यह मामला केवल उनके या कांग्रेस अध्यक्ष के पद से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि ‘‘व्यापक तौर पर करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है जो इस क्रूर वास्तविकता से रोज रूबरू होते रहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए यह रोष मेरा नहीं बल्कि ऐसे करोड़ो लोगों की अभिव्यक्ति है, यह ऐसी मानसिकता का मुद्दा है, जिससे समाज का एक तबका सीधे जुड़ा है।’’

खरगे ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा में यह मुद्दा सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया था और अब नड्डा से अपेक्षा है कि वह सदन में दिए गए आश्वासन के अनुरूप मामले में कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।

भाषा हक वैभव देवेंद्र

देवेंद्र


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