बीसीआई कार्यालय के बाहर वकीलों से मारपीट का आरोप, उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय जाने को कहा
बीसीआई कार्यालय के बाहर वकीलों से मारपीट का आरोप, उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय जाने को कहा
नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उन वकीलों के एक समूह से दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा, जिन्होंने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट की घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की थी।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि बीसीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर वकीलों के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि मारपीट करने वाले लोगों ने खुद को वकील बताया।
भूषण ने दावा किया, ‘‘बीसीआई अध्यक्ष ने बयान जारी कर गर्व से कहा कि कुछ कानूनी कॉकरोच यहां प्रदर्शन कर रहे थे और हमारे वकील आए तथा आधी रात में उनकी पिटाई कर दी। हम सीबीआई जांच और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं। हमें डर है कि बीसीआई की सीसीटीवी फुटेज नष्ट कर दी जाएगी।’’
उच्चतम न्यायालय ने भूषण से कहा कि वह इस मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करें।
वकीलों के एक समूह ने 20 अगस्त को यहां बीसीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने बीसीआई के कामकाज में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की थी।
प्रदर्शन के दौरान कानूनी बिरादरी के सदस्यों ने कई मांगें उठाईं। इनमें अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करना, सभी वकीलों को बीमा कवरेज देना तथा विधि कॉलेजों का नियमित और पारदर्शी निरीक्षण शामिल था।
इस प्रदर्शन का आह्वान ‘ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन’ ने किया था और इसे कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) का समर्थन प्राप्त था।
इससे पहले मनन कुमार मिश्रा ने कानून के छात्रों की आलोचना का सामना करने के बाद उनसे माफी मांगी थी। विवाद एक ऐसे आदेश को लेकर हुआ था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। उस आदेश में राज्य बार काउंसिल्स से कहा गया था कि नालसार से इस वर्ष स्नातक करने वाले छात्रों के मौजूदा बैच में से किसी को भी अधिवक्ता के रूप में नामांकित न किया जाए।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब नालसार विधि विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखकर भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के प्रस्ताव का विरोध किया।
पहले जारी किए गए एक परिपत्र में मनन कुमार मिश्रा ने कहा था कि वह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सीजेआई की भागीदारी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे हैं और उन्होंने जिम्मेदार लोगों की पहचान करने वाली रिपोर्ट मांगी थी।
कानूनी बिरादरी के सदस्यों की आलोचना के बाद कुछ ही घंटों के भीतर यह फैसला वापस ले लिया गया। संशोधित आदेश में कहा गया कि ‘‘अधिकांश छात्र’’ निर्दोष हैं और कुछ छात्रों के कथित गलत आचरण के लिए उन्हें सजा नहीं दी जानी चाहिए।
बाद में सीजेआई ने बीसीआई को इस आदेश के लिए फटकार लगाई और कहा कि यह ‘‘छात्रों और मेरे बीच संवाद’’ का मामला था।
इसके बाद नालसार स्टूडेंट बार काउंसिल ने मनन कुमार मिश्रा से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के स्नातक छात्रों, मौजूदा छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी संयुक्त बयान जारी कर इसी तरह की माफी की मांग की। उन्होंने अपने दीक्षांत समारोह में बीसीआई अध्यक्ष और सीजेआई की मौजूदगी को भी अस्वीकार कर दिया।
भाषा गोला वैभव
वैभव

Facebook


