किसान आंदोलन : ‘भारत बंद’ को वकीलों का समर्थन, दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में रखा काम ठप

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किसान आंदोलन : 'भारत बंद' को वकीलों का समर्थन, दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में रखा काम ठप

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  • Publish Date - December 8, 2020 / 02:24 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:07 PM IST

नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के समर्थन में मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न जिला अदालत परिसरों में वकीलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।

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कड़कड़डूमा जिला अदालत परिसर में वकीलों ने कानूनों को वापस लेने को लेकर नारेबाजी करते हुए विरोध मार्च किया। तीस हजारी अदालत परिसर में भी वकीलों ने किसानों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए एक बैठक की और अपनी ओर से कुछ मांगे रखीं।

तीस हजारी अदालत में हुए प्रदर्शन में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) की एक्शन कमेटी के मुख्य संयोजक अधिवक्ता राजीव खोसला ने कहा कि सरकार को कृषि कानूनों में एक शर्त रखनी चाहिए कि कृषि उत्पादों के लिए निजी कंपनियां न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से पांच प्रतिशत अधिक भुगतान करे और उल्लंघन करने पर तीन से पांच साल तक सजा का प्रावधान किया जा सकता है।

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बीसीडी और दिल्ली में सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की समन्वय समिति द्वारा संयुक्त रूप से जारी बयान के मुताबिक खोसला ने कहा कि मांगे नहीं माने जाने पर वकीलों की एक्शन कमेटी जल्द ही देश स्तर पर आंदोलन का आह्वान करेगी। इस संबंध में विभिन्न राज्यों की बार काउंसिलों और बार एसोसिएशनों के साथ बैठक कर तारीख तय की जाएगी।

बयान के मुताबिक समन्वय समिति के अध्यक्ष संजीव एन ने कहा कि सरकार हर आंदोलन को देशद्रोही लोगों का प्रदर्शन बताते हुए जनता की आवाज को दबाने की साजिश कर रही है और सोशल मीडिया के जरिए दुष्प्रचार किया जा रहा है कि किसान आंदोलन को ‘खालिस्तान’ का समर्थन हासिल है।

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अधिवक्ता सत्य प्रकाश गौतम ने कहा कि किसानों के आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखाते हुए कड़कड़डूमा अदालत परिसर के भीतर करीब 100 वकीलों ने प्रदर्शन किया।