लद्दाख के नेताओं ने वांगचुक की रिहाई का स्वागत किया और अन्य लोगों की रिहाई की मांग की

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लद्दाख के नेताओं ने वांगचुक की रिहाई का स्वागत किया और अन्य लोगों की रिहाई की मांग की

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  • Publish Date - March 14, 2026 / 04:40 PM IST,
    Updated On - March 14, 2026 / 04:40 PM IST

नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) लद्दाख के नेताओं ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जोधपुर जेल से रिहाई का स्वागत किया और शेष बंदियों की रिहाई की मांग की।

केंद्र सरकार द्वारा हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किए जाने के बाद वांगचुक को आज राजस्थान की जोधपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया।

लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा ने वांगचुक की रिहाई का स्वागत किया तथा सरकार से लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की उनकी मांगों को स्वीकार करने का आग्रह किया।

हनीफा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम सोनम वांगचुक की रिहाई का स्वागत करते हैं। साथ ही अन्य बंदियों को भी रिहा किया जाना चाहिए, और सरकार को विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को भी वापस लेना चाहिए।’’

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने बयान में केंद्र शासित प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘बंद और विरोध प्रदर्शनों का मौजूदा माहौल समाज के शांतिप्रिय स्वभाव के लिए हानिकारक साबित हुआ है और इससे छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यवसायों, पर्यटन संचालकों, पर्यटकों और समग्र अर्थव्यवस्था सहित समुदाय के विभिन्न वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।’’

हालांकि, हनीफा ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है और उन्होंने सरकार से बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने का आग्रह किया।

‘कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस’ (केडीए) के सदस्य सज्जाद कारगिली ने फेसबुक पर एक पोस्ट में डेलदान नामग्याल और स्मानला दोरजे की तत्काल रिहाई की मांग की और सरकार से अन्य सभी बंदियों के खिलाफ सभी आरोप बिना शर्त हटाने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘सोनम वांगचुक के खिलाफ रासुका को रद्द करना एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि, हमारे वैध अधिकारों के लिए हमारा संघर्ष जारी है।’’

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। विरोध-प्रदर्शनों में 22 पुलिसकर्मियों सहित 45 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

उन्हें लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर ‘‘जनव्यवस्था बनाए रखने’’ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था और फिर जोधपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप