लखीमपुर खीरी हिंसा मामला: न्यायालय ने गवाहों को पेश न किए जाने पर अप्रसन्नता जताई

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लखीमपुर खीरी हिंसा मामला: न्यायालय ने गवाहों को पेश न किए जाने पर अप्रसन्नता जताई

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  • Publish Date - May 8, 2026 / 12:02 PM IST,
    Updated On - May 8, 2026 / 12:02 PM IST

नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा और अन्य के खिलाफ 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुनवाई के दौरान गवाहों को पेश न किए जाने पर शुक्रवार को अप्रसन्नता व्यक्त की।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जो स्थिति रिपोर्ट सौंपी है जिसमें गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया है।

पीठ ने यह भी कहा कि लगभग दो महीने से इस मामले में किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है।

पीठ ने कहा, ‘‘ हम पीठासीन न्यायाधीश को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानूनसम्मत कदम उठाने का निर्देश देते हैं।’’

पीठ ने निचली अदालत के न्यायाधीश से मुकदमे को समयबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रयास करने और अदालत के समक्ष स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

उच्चतम न्यायालय लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। घटना से जुड़े दो मामलों की सुनवाई उत्तर प्रदेश की एक अदालत में चल रही है।

लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में तीन अक्टूबर, 2021 को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के विरोध में किसानों द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे।

चार किसानों को एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) ने कुचल दिया था। इसके बाद कथित तौर पर क्रोधित किसानों ने एक चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई।

एक मामले में, निचली अदालत ने दिसंबर 2023 में मिश्रा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ किसानों की मौत के मामले में कथित हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य दंडात्मक धाराओं के तहत आरोप तय किए, जिससे मुकदमे का रास्ता साफ हो गया।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा