(सुमीर कौल)
श्रीनगर/दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का आतंकवादी उमेर हारिस उर्फ ‘खरगोश’ सज्जाद नाम से जारी जाली पासपोर्ट का इस्तेमाल करके देश छोड़ने के बाद संभवत: सऊदी अरब पहुंच गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
सज्जाद के बारे में दावा किया गया है कि वह राजस्थान का निवासी है।
एलईटी के इस अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल की जांच का नेतृत्व कर रही श्रीनगर पुलिस ने केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ यह जानकारी साझा की है।
अधिकारियों ने कहा कि इससे उन खामियों को लेकर चिंता बढ़ी है, जिनके कारण इस तरह के दुरुपयोग संभव हो पाते हैं।
उन्होंने बताया कि इस महीने की शुरूआत में जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा दर्ज किया गया मामला संभवतः राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपा जाएगा।
साथ ही, संबंधित राज्य पुलिस बलों को भी जानकारी दी गई है ताकि तुरंत कार्रवाई हो सके और खामियों को दूर किया जा सके।
पहले की रिपोर्टों में कहा गया था कि हारिस कराची का रहने वाला है लेकिन अब सामने आया है कि वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का निवासी है।
अधिकारियों ने कहा कि वह लश्कर-ए-तैयबा में इसलिए शामिल हुआ ताकि वह पुलिस कार्रवाई से बच सके क्योंकि उसके खिलाफ कराची में आगजनी के कई मामले लंबित थे। बाद में उसे आतंकी संगठन ने 2012 में जम्मू-कश्मीर भेज दिया।
हारिस को ‘खरगोश’ उपनाम इसलिए मिला क्योंकि वह बहुत तेजी से जगह बदलकर सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बच निकलता था।
जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के अनुसार, हारिस कश्मीर घाटी में उत्तरी दिशा से घुसपैठ करने के बाद बांदीपोरा और श्रीनगर के अलग-अलग स्थानों पर रहा। उसने लश्कर के एक आतंकी (ओवर ग्राउंड वर्कर) की बेटी से शादी भी की। यह निकाह समारोह उसके झूठे नाम “सज्जाद” के साथ जयपुर में हुआ था।
अधिकारियों ने बताया कि इस शादी के दस्तावेजों का इस्तेमाल उसने भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में भी किया गया।
इस अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल के खुलासे ने कई खामियों को उजागर किया है। सवाल उठ रहे हैं कि राजस्थान में पुलिस सत्यापन प्रणाली के बावजूद पासपोर्ट कैसे जारी हो गया।
अधिकारियों के अनुसार, लश्कर का यह आतंकवादी बाद में इंडोनेशिया चला गया, जहां से उसने 2024-25 में एक और फर्जी यात्रा दस्तावेज का उपयोग करके सऊदी अरब में कहीं शरण ली।
उन्होंने कहा कि उसे सऊदी अरब से प्रत्यर्पित कराने और भारत लाने के लिए कूटनीतिक माध्यमों से प्रयास किए जा रहे हैं।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश