लेह: आसमान में छाए बादलों और हल्की बर्फबारी के बीच बुद्ध के अवशेषों की प्रदर्शनी में उमड़ी भीड़

Ads

लेह: आसमान में छाए बादलों और हल्की बर्फबारी के बीच बुद्ध के अवशेषों की प्रदर्शनी में उमड़ी भीड़

  •  
  • Publish Date - May 1, 2026 / 07:02 PM IST,
    Updated On - May 1, 2026 / 07:02 PM IST

(उत्पल बरुआ)

लेह, एक मई (भाषा) लेह के जीव-त्सल में हल्की बर्फबारी और शांत एवं भक्तिमय माहौल में हजारों की संख्या में श्रद्धालु बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध के अवशेषों की एक प्रदर्शनी को देखने के लिए पहुंचे।

इस प्रदर्शनी का उद्धघाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया है।

फोटांग स्थित जीव-त्सल में एकत्रित हुए श्रद्धालु बर्फ से ढके हुए पहाड़ों की पृष्ठभूमि में स्थिर खड़े रहे। इस दौरान कई लोगों ने हाथ जोड़े रखे, कुछ आसमान की ओर देखते नजर आए तो कुछ ने मौन प्रार्थना में अपनी आंखें बंद कर रखी थीं।

सबमें यह भावना थी कि ये मौसम गुजर न जाए।

कई लोगों के लिए, हल्की बूंदा-बांदी और बर्फबारी का विशेष महत्व था, जिसे गौतम बुद्ध के पवित्र अवशेषों की दुर्लभ प्रदर्शनी के लिए आशीर्वाद माना जा रहा था।

बुद्ध के अवशेषों को 28 अप्रैल को लेह लाया गया था और इन अवशेषों को देखने के लिए लद्दाख व आसपास के इलाकों से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।

बौद्ध परंपरा में बुद्ध के अवशेषों को उनकी उपस्थिति और शिक्षाओं का प्रतीक माना जाता है।

अक्सर यह माना जाता रहा है कि इनमें आध्यात्मिक ऊर्जा होती है जो अनुयायियों में शांति, करुणा और ध्यान की भावना जगाती है।

इन अवशेषों की सार्वजनिक प्रदर्शनी दुर्लभ और अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है जो श्रद्धालुओं को चिंतन व आशीर्वाद का अवसर प्रदान करती है।

लद्दाख बौद्ध संघ (एलबीए) के अध्यक्ष त्सेरिंग दोरजे ने कहा कि बुद्ध के अवशेषों को लेह लाये जाने के बाद से प्रकृति में दिखाई देने वाले संकेतों से लोगों का मन प्रसन्न हो रहा है।

उन्होंने कहा,“जब अवशेषों को लाया गया, तब आकाश बादलों से ढका हुआ था और पर्वत चोटियां बर्फ से सफेद हो गई थीं। लोगों को लगा कि यह एक शुभ क्षण है, मानो भगवान बुद्ध लद्दाख को आशीर्वाद दे रहे हों।”

दोरजे ने बताया कि स्पितुक मठ के ऊपर इंद्रधनुष भी दिखाई दिया।

दोरजे ने कहा, “ऐसे संकेत आस्था को बल देते हैं। ऐसे समय में जब दुनिया हिंसा का सामना कर रही है, इन अवशेषों की उपस्थिति शांति और करुणा का संदेश देती है।” स्थानीय भिक्षु त्सेरिंग ग्यालसन ने कहा कि प्रदर्शनी के दौरान का वातावरण लोगों के बीच आंतरिक शांति को दर्शा रहा था।

उन्होंने कहा,“मौसम सुहावना हो गया और लोगों का मन भी शांत हो गया। हल्की बारिश और बर्फबारी को शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह वहां मौजूद सभी लोगों को एक आशीर्वाद जैसा महसूस हुआ।”

श्रद्धालु थाइनलास आंगचुक ने बताया कि कैसे ये क्षण शांति से बीते।

उन्होंने कहा, “जब दूर पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हुई तो कोई कुछ नहीं बोला। लोग बस चुपचाप खड़े रहे। ऐसा लगा जैसे शांत वातावरण अचानक से दिव्य हो गया है और हम सब किसी ऐसी शक्ति से जुड़ गए हैं जो आलौकिक है।” स्कूल शिक्षिका पद्मा नॉरजिन ने कहा कि दर्शन स्थल का माहौल अचानक बदलने का एक अर्थ था।

उन्होंने कहा, “पहाड़ों, बादलों और बर्फबारी ने वातावरण को एकदम शांत कर दिया। इसने लोगों को अधिक चिंतनशील बनाया, उन्हें इस बात का एहसास दिलाया कि वे यहां क्यों आए थे।”

एक अन्य शिक्षिका ताशी डोलमा ने कहा कि बदलते मौसम में मानो कोई गहरा संदेश छिपा था।

उन्होंने कहा, “मौसम के बदलते स्वरूप ने हमें शांति का एहसास दिलाया। कई लोगों के लिए, यह एक ऐसा आशीर्वाद था जिसे वे न केवल देख सकते थे बल्कि महसूस भी कर सकते थे।”

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश