शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी अध्यादेश के विरोध में लोस ने प्रस्ताव स्वीकारा

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शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी अध्यादेश के विरोध में लोस ने प्रस्ताव स्वीकारा

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 05:22 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 05:22 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) सरकार संसद के मानसून सत्र में एक विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जो उस अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके तहत भारत के प्रधान न्यायाधीश सहित उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी।

लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों द्वारा लाए गए उस सांविधिक संकल्प को स्वीकार कर लिया है, जिसमें इस अध्यादेश का विरोध किया गया है। इसकी जानकारी बुधवार को लोकसभा के बुलेटिन में दी गई।

प्रक्रिया के अनुसार, जब किसी अध्यादेश की जगह कानून बनाने के लिए विधेयक पेश किया जाता है, तो विपक्ष उसके विरोध में सांविधिक संकल्प लाता है।

अध्यादेश सरकार की कार्यकारी शक्ति के तहत जारी किया जाने वाला आदेश है, जिसके जरिये संसद का सत्र न चलने पर जरूरत पड़ने की स्थिति में कानून बनाए जा सकते हैं।

संकल्प में कहा गया है कि, ‘‘यह सदन उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 को अस्वीकार करता है।’

पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पी. के. मल्होत्रा ने कहा, ‘किसी अध्यादेश की अवधि छह महीने होती है, लेकिन जैसे ही संसद का सत्र शुरू होता है, उस अध्यादेश को छह सप्ताह यानी 42 दिन में संसद से कानून के रूप में पारित कराना होता है। ऐसा नहीं होने पर अध्यादेश स्वतः समाप्त हो जाता है।’

मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने वाले एक विधेयक को मंजूरी दी थी, लेकिन इसके तुरंत बाद सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया।

अध्यादेश लागू होने के बाद बढ़ाई गई स्वीकृत संख्या के आधार पर उच्चतम न्यायालय में पांच न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई।

इस प्रस्तावित विधेयक के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता नहीं है और इसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त है।

वर्ष 2019 में उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर) 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।

वर्ष 1956 के उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम में प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 10 तय की गई थी। वर्ष 1960 के संशोधन अधिनियम के तहत यह संख्या 13 की गई और बाद में एक अन्य संशोधन के जरिये 17 कर दी गई।

वर्ष 1986 के संशोधन अधिनियम से न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 (प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर) कर दी गई। इसके बाद वर्ष 2009 के संशोधन से यह संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई।

उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) की सिफारिश से शुरू होती है। प्रधान न्यायाधीश केंद्रीय कानून मंत्री को पत्र लिखते हैं। इसके बाद वित्त मंत्रालय से परामर्श करने के बाद, कानून मंत्रालय का न्याय विभाग मसौदा विधेयक तैयार करके मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजता है।

भाषा

जोहेब पवनेश सुरेश

सुरेश