मप्र: सीधी में हाथी के हमले में दंपति की मौत, ग्रामीणों ने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया

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मप्र: सीधी में हाथी के हमले में दंपति की मौत, ग्रामीणों ने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 03:39 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 03:39 PM IST

सीधी, एक जून (भाषा) मध्यप्रदेश के सीधी जिले के एक गांव में रविवार देर रात जंगली हाथियों के झुंड ने एक दंपति को कुचलकर मार डाला। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि यह हमला जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर गजरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले चिंगी गांव में देर रात करीब दो बजे हुआ।

सीधी जिला पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा हुआ है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाथियों के झुंड ने एक कच्चे मकान को घेर लिया और भैयालाल यादव (60) तथा उसकी पत्नी तिलिया (58) पर उस समय हमला कर दिया, जब दोनों सो रहे थे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हाथियों ने मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया और दंपति को कुचलकर मार डाला।

घटना के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने मृतकों के शव पुलिस को सौंपने से इनकार कर दिया और दावा किया कि मौतें प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा थीं।

पुलिस अधीक्षक (एसपी) संतोष कोरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को दूर करने के लिए राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है।

कोरी ने कहा, “हमने ग्रामीणों को शांत करने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।”

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई परिवारों को पुनर्वास कार्यक्रम के तहत वन क्षेत्र से स्थानांतरित किया गया था, लेकिन भैयालाल यादव के परिवार के सदस्यों सहित 40 निवासियों को योजना का लाभ नहीं मिला।

उन्होंने दावा किया कि नतीजतन गांव को पूरी तरह से खाली नहीं किया जा सका और कुछ निवासी ऐसे क्षेत्र में रह रहे, जहां हाथियों का आना-जाना लगा रहता है।

ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने प्रशासन और क्षेत्र के उप-संभागीय मजिस्ट्रेट के कार्यालय में स्थानांतरण की मांग के लिए कई आवेदन जमा किए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि पुनर्वास पैकेज पहले प्रति व्यक्ति 10 लाख रुपये था और लगभग एक साल पहले इसे बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया था।

क्षेत्र के उप-संभागीय मजिस्ट्रेट शैलेश कुमार द्विवेदी ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।

भाषा

सं ब्रजेन्द्र पारुल

पारुल