मदुरै, 27 जुलाई (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने सी. जोसेफ विजय नीत तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के उस आदेश को सोमवार को रद्द कर दिया, जिसमें पिछले साल करूर में हुई भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान किया गया था।
न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने कहा कि सरकारी विभागों में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का इंतज़ार कर रहे कई लोगों की ज़रूरतों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
पीठ ने कहा कि जब प्रतीक्षा सूची मौजूद हो, तो उनकी जरूरतों को नजरअंदाज करके करूर घटना के पीड़ितों के परिजनों के लिए ऐसी राहत देना उचित नहीं है।
अदालत ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत देश के नागरिक को मिली गारंटी का सीधा उल्लंघन हैं।’’
पीठ ने कहा कि सरकार की शक्तियों का प्रयोग संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए।
इस बीच, आधिकारिक सूत्रों ने संकेत दिया कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करने पर विचार कर रही है।
इसके अलावा, अदालत ने पटाखा निर्माण इकाइयों में हादसों और सड़क दुर्घटनाओं में जान जाने की घटनाओं का भी ज़िक्र किया।
ऐसे मामलों में, पीड़ितों के परिजनों को अनुग्रह राशि दी जाती है, न कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाती है।
पीठ ने यह भी कहा कि भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के आदेश से इसी तर्ज पर नौकरी की मांग करने वालों की बाढ़ आ जाएगी।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के 31 परिजनों को 10 जुलाई 2026 को नियुक्ति पत्र सौंपे थे।
टीवीके की एक रैली में मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे।
भाषा सुभाष नेत्रपाल
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