ममता के 8 अप्रैल को भवानीपुर से नामांकन दाखिल करने की संभावना

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ममता के 8 अप्रैल को भवानीपुर से नामांकन दाखिल करने की संभावना

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 06:42 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 06:42 PM IST

कोलकाता, 31 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल के चुनावी मौसम में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र राज्य में सबसे चर्चित मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है।

मौजूदा विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के दो अप्रैल को इस क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल करने की उम्मीद है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

उसके छह दिन बाद, आठ अप्रैल को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना नामांकन दाखिल करने के लिए कालीघाट स्थित अपने आवास से जुलूस के रूप में गोपालनगर सर्वे बिल्डिंग तक जा सकती हैं।

भवानीपुर इस बार आम विधानसभा क्षेत्र नहीं है, बल्कि दो प्रमुख नेताओं के बीच मुकाबले के कारण लोगों की निगाहें इस ओर हैं। सीट पर पश्चिम बंगाल के दो अहम प्रतिद्वंद्वी एक बार फिर एक-दूसरे का सामना करेंगे।

ममता बनर्जी 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद इसी क्षेत्र से विधानसभा पहुंचीं। उसके बाद 2021 में नंदीग्राम में अधिकारी से बहुचर्चित मुकाबला हारने के बाद उन्होंने एक बार फिर इसी सीट से उपचुनाव में जीत हासिल करके विधानसभा में वापसी की।

इस बार भाजपा ने भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ अधिकारी को मैदान में उतारा है।

तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, बनर्जी का आठ अप्रैल का जुलूस कालीघाट स्थित उनके आवास से शुरू होकर गोपालनगर सर्वे बिल्डिंग में नामांकन केंद्र तक जाने की संभावना है। मार्च में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी, कोलकाता के मेयर और शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम, दक्षिण कोलकाता जिला अध्यक्ष देबाशीष कुमार और भवानीपुर और आसपास के वार्डों के लगभग सभी पार्टी पार्षद शामिल हो सकते हैं।

उधर, भाजपा भी नामांकन के दौरान शक्ति प्रदर्शन करना चाह रही है। अधिकारी के नामांकन से पहले दो अप्रैल को अमित शाह के नेतृत्व में एक रोडशो होने की उम्मीद है, जिससे यह मुकाबला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित होगा। भाजपा का यह संदेश देने का प्रयास होगा कि भवानीपुर में ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में हराया जा सकता है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि शाह की उपस्थिति का उद्देश्य कार्यकर्ताओं में जोश भरना और दक्षिण कोलकाता में तृणमूल विरोधी मतों को एकजुट करना है।

राजनीतिक आकलन के अनुसार, भवानीपुर की मतदाता सूची से लगभग 47,000 नाम हटा दिए गए हैं, जबकि अन्य 14,000 नामों की जांच अभी बाकी है। यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2021 में भवानीपुर उपचुनाव में बनर्जी को 58,000 मतों से जीत मिली थी।

तृणमूल के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन लोगों के नामों की जांच हो रही है, उनमें से 56 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम बताए जा रहे हैं। तृणमूल का आरोप है कि इस संशोधन प्रक्रिया से उसके समर्थन आधार पर प्रभाव पड़ सकता है, जबकि भाजपा का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल अपात्र मतदाताओं को हटाना है।

भाषा अविनाश दिलीप

दिलीप