कोलकाता, 15 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भाभी कजरी बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के कई पूर्व सांसद सोमवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद शुभेंदु अधिकारी के पहले आधिकारिक दौरे के दौरान आयोजित किया गया था।
यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के भीतर हुई बगावत के बीच सामने आया है, जिसमें पार्टी के लगभग 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) नामक दल में विलय करने और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन करने की घोषणा की है।
केएमसी के कार्यक्रम में मौजूद लोगों में माला रॉय भी शामिल थीं, जो निकाय की पूर्व अध्यक्ष और कोलकाता दक्षिण से तृणमूल सांसद हैं। वह राजग का समर्थन करने वाले सांसदों में से हैं। तृणमूल विधायक और कोलकाता के पूर्व महापौर फरहाद हकीम भी वहां मौजूद थे। हकीम के इस्तीफे के कारण ही तृणमूल नीत बोर्ड भंग हो गया था।
महापौर पद से हकीम के इस्तीफे के कुछ दिनों बाद, नौ जून को राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण वाले बोर्ड को भंग कर दिया और एक प्रशासक नियुक्त किया। सरकारी आदेश में यह तय किया गया कि सभी पार्षद, महापौर की परिषद के सदस्य, समिति के सदस्य और अध्यक्ष, कोलकाता नगर निगम अधिनियम-1980 के प्रावधानों के अनुसार अपने पद छोड़ देंगे।
शुभेंदु के साथ मंच पर रॉय, हकीम और तृणमूल नियंत्रित पिछली बोर्ड से जुड़े कई नेता मौजूद थे। वहीं भाजपा के पूर्व पार्षद सभागार में दूसरी तरफ बैठे थे।
केएमसी के वार्ड संख्या 73 की पूर्व पार्षद और ममता बनर्जी के परिवार की सदस्य, कजरी बनर्जी ने कहा कि उन्हें नागरिक मुद्दों और विकास योजनाओं पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया गया था।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ पार्षद के तौर पर हमारा जो भी थोड़ा-बहुत कार्यकाल बचा है, उसके लिए हमें बुलाया गया है ताकि विकास कार्य सुचारू रूप से जारी रह सकें। यह अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सदस्यों को भी आमंत्रित किया है।’’
केंद्रीय एजेंसियों द्वारा तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को बार-बार समन भेजे जाने के बारे में पूछे जाने पर कजरी बनर्जी ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कजरी बनर्जी के अलावा, पूर्व पार्षद देबाशीष कुमार, अनन्या बनर्जी, जुई विश्वास और असीम बोस भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
उन्होंने रेखांकित किया कि उनकी भागीदारी का मकसद नागरिक सेवाओं में निरंतरता बनाए रखना था, न कि किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत देना।
रॉय की मौजूदगी ने भी इस कार्यक्रम के राजनीतिक महत्व को बढ़ा दिया। कोलकाता में तृणमूल की वरिष्ठ नेता और केएमसी की पूर्व अध्यक्ष रॉय, अब उन बागी सांसदों के समूह का हिस्सा हैं, जिन्होंने राजग का समर्थन करने का फैसला किया है। इस फैसले की वजह से पार्टी के इतिहास में संसद के भीतर सबसे बड़ी फूट पड़ी है।
भाषा धीरज नोमान
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