मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं, गहलोत ने केंद्र पर साधा निशाना

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मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं, गहलोत ने केंद्र पर साधा निशाना

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 10:02 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 10:02 PM IST

जयपुर, चार अगस्त (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि संसद में सरकार द्वारा यह बताए जाने के बाद कि बांसवाड़ा जिले में मानगढ़ धाम को प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने के योग्य नहीं पाया गया, केंद्र का आदिवासी विरोधी रवैया उजागर हो गया है।

गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखते हैं तथा उनकी पहचान और इतिहास का सम्मान नहीं करते।

बांसवाड़ा जिले का मानगढ़ धाम वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां आदिवासी नेता गोविंद गुरु ने अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों को संगठित किया था। वर्ष 1913 में ब्रिटिश सेना की गोलीबारी में सैकड़ों आदिवासी पुरुष और महिलाएं शहीद हुए थे। इस कारण इस स्थल को ‘आदिवासियों का जलियांवाला बाग’ भी कहा जाता है।

गहलोत ने कहा कि 2022 में मोदी के मानगढ़ धाम दौरे के दौरान यह संदेश गया था कि जल्द ही इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलेगा।

उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसके लिए गंभीर प्रयास किए थे, लेकिन केंद्र सरकार ने इस मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की।

एक दिन पहले केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सांसद हनुमान बेनीवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने का अनुरोध प्राप्त हुआ था, लेकिन निरीक्षण के बाद इसे इसके लिए अयोग्य पाया गया।

गहलोत ने कहा कि राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने जुलाई 2022 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को विस्तृत रिपोर्ट सौंपकर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की सिफारिश की थी।

उन्होंने भाजपा के रुख पर सवाल उठाते हुए राजस्थान के केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों से पूछा कि क्या वे प्रदेश की भावनाओं और आदिवासी समाज के बलिदान को भूल गए हैं।

भाषा बाकोलिया राजकुमार

राजकुमार