एमसीडी,एनडीएमसी सामान जब्ती के 24 घंटे के भीतर रेहड़ी-पटरी वालों को मेमो दें: अदालत

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एमसीडी,एनडीएमसी सामान जब्ती के 24 घंटे के भीतर रेहड़ी-पटरी वालों को मेमो दें: अदालत

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  • Publish Date - September 14, 2026 / 03:42 PM IST,
    Updated On - September 14, 2026 / 03:42 PM IST

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) से कहा है कि वे रेहड़ी-पटरी वालों का सामान जब्त करने के 24 घंटे के अंदर उन्हें जब्ती ‘मेमो’ जारी करें और जब्ती प्रक्रिया का वीडियो भी बनाएं।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा कि जब्ती मेमो में जब्ती की तारीख, जब्त की गई वस्तुओं की सूची, उन्हें रखे जाने की जगह की जानकारी, अगर कोई अर्थदंड लगाया गया हो तो उसकी जानकारी और संबंधित अधिकारी का विवरण शामिल होना चाहिए।

अदालत ने 10 सितंबर को एक जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। यह याचिका एमसीडी और एनडीएमसी द्वारा रेहड़ी-पटरी वालों की वस्तुएं जब्त करने से संबंधित है। यह जब्ती उस वक्त की जाती है जब रेहड़ी-पटरी वाले नियमों का उल्लंघन करते हैं।

याचिकाकर्ता संगठन, ‘रेहड़ी-पटरी एकता मंच’ ने याचिका में कहा था कि जब भी वस्तुएं जब्त की जाती हैं, तो एमसीडी और एनडीएमसी की ओर से कोई जब्ती मेमो नहीं तैयार किया जाता और न ही जब्त की गई सामग्री की सूची दी जाती है। याचिका में कहा गया है कि वस्तुएं जब्त किये जाने के बाद शाम को सिर्फ जुर्माना भरने की रसीद दी जाती है।

दोनों नगर निकायों के वकील ने कहा कि आम तौर पर जब्ती की कार्रवाई एक खास समय पर की जाती है और अगर संबंधित अधिकारी मौके पर ही जब्ती का ‘मेमो’ तैयार करते हैं, तो अन्य रेहड़ी-पटरी वालों को इस बारे में पता चल जाता है और वे नियम तोड़ने के बावजूद जब्ती की कार्रवाई से बच निकलते हैं।

वकील ने दलील दी कि इसलिए, पहले जब्ती की कार्रवाई की जाती है और शाम को जब्ती मेमो के साथ जुर्माने की रसीद तैयार करके संबंधित विक्रेताओं को सौंप दी जाती है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि दोनों नगर निकायों से रेहड़ी-पटरी वाले आजीविका संरक्षण और फुटपाथ विक्रेता नियमन अधिनियम, 2014 की धारा 19 का पालन करने की उम्मीद की जाती है। इस धारा के तहत, वस्तुएं जब्त किए जाने पर सूची तैयार की जानी चाहिए और उसकी एक प्रति विक्रेता को दी जानी चाहिए।

आदेश के अनुसार, ‘‘इसलिए, अधिकारियों की इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए कि अगर जब्ती के मेमो मौके पर ही तैयार किये जाते हैं, तो इलाके के दूसरे विक्रेता कार्रवाई से बच निकलते हैं, एमसीडी और एनडीएमसी को यह इजाजत दी जाती है कि वे जब्ती के 24 घंटे के भीतर कानून के मुताबिक जब्ती मेमो जारी कर सकते हैं।’’

अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि एनडीएमसी की तरह एमसीडी को भी जब्ती की कार्रवाई के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करनी चाहिए।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश