निरर्थक मामलों से राष्ट्रीय महत्व के मामलों की सुनवाई में विलंब होता है: उच्चतम न्यायालय

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निरर्थक मामलों से राष्ट्रीय महत्व के मामलों की सुनवाई में विलंब होता है: उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - June 1, 2021 / 10:55 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 09:00 PM IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि उसके समक्ष बड़ी संख्या में निरर्थक मामले दाखिल किये जा रहे हैं जिनकी वजह से शीर्ष अदालत का बहुत ज्यादा समय बर्बाद हो जाता है।

न्यायालय ने कहा कि इस वजह से राष्ट्रीय महत्व के मुकदमों की सुनवाई और निपटारे में अनावश्यक विलंब हो जाता है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की विशेष पीठ ने यह टिप्पणी उपभोक्ता विवाद से संबंधित एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान की।

पीठ ने कहा कि मामले का निपटारा हो चुका है और अंतिम आदेश पारित किया जा चुका है लेकिन याचिकाकर्ता फिर से एक छोटे से मुद्दे पर एक आवेदन के साथ आ गये है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘हम पहले से निपटाए गए मामले में एक और आदेश पारित नहीं कर सकते हैं। हमें आपकी बात नहीं सुननी चाहिए। न्यायाधीशों को दिन की शुरुआत होते ही इन फाइलों को देखने के लिए अपना महत्वपूर्ण समय बिताना पड़ता है।’’

उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के पास राष्ट्रीय महत्व के उन मामलों को देखने का समय होना चाहिए, जो गंभीर मामले हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आज, जब हम सूचीबद्ध मामलों को देख रहे थे, तो हमने पाया कि 95 प्रतिशत मामले निरर्थक हैं। कल, मुझे कोविड प्रबंधन पर स्वत: संज्ञान मामले में आदेश को अंतिम रूप देना था, जो राष्ट्रीय महत्व का मामला है, लेकिन इसे अपलोड नहीं किया जा सका क्योंकि मुझे आज के लिए सूचीबद्ध मामलों को देखना था।’’

पीठ ने आवेदन पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘निरर्थक मामलों से अदालत का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो जाता है। अदालत अपने महत्वपूर्ण समय का उपयोग गंभीर मामलों, राष्ट्रीय महत्व के मामलों पर कर सकती है।’’

भाषा

देवेंद्र अनूप

अनूप