कश्मीर: महबूबा ने अधिकारियों से मुहर्रम का जुलूस निकालने की इजाजत देने का किया आग्रह

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कश्मीर: महबूबा ने अधिकारियों से मुहर्रम का जुलूस निकालने की इजाजत देने का किया आग्रह

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  • Publish Date - June 16, 2026 / 02:56 PM IST,
    Updated On - June 16, 2026 / 02:56 PM IST

श्रीनगर, 16 जून (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर प्रशासन से घाटी में मुहर्रम के जुलूस निकालने की अनुमति देने और ईरान के घटनाक्रमों को लेकर प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसएए) के तहत गिरफ्तार किये गये युवाओं को रिहा करने की मंगलवार को अपील की।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक बयान में कहा कि धार्मिक जुलूस इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि लोगों की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए इन आयोजनों को सुचारु रूप से आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस्लामी नववर्ष का पहला महीना मुहर्रम जम्मू कश्मीर में बुधवार से शुरू होगा और इसके 10वें दिन, 26 जून को ‘आशूरा’ के जुलूस निकाले जाएंगे।

महबूबा ने कहा, “मुहर्रम त्याग और स्मरण का समय है। इमाम हुसैन के आदर्श आज भी लोगों को न्याय, करुणा और मानव गरिमा के लिए खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। सरकार का दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करे कि लोग इन पाक दिनों को स्वतंत्र और शांतिपूर्ण तरीके से मना सकें।”

उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि यह क्षेत्र की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।

पीडीपी प्रमुख ने कहा, “मुहर्रम जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए गहरे धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। प्रशासन को शोक मनाने वालों और श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।”

उन्होंने प्रशासन से धार्मिक सभाओं और जुलूसों के सुचारु आयोजन के लिए यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छता, पेयजल, बिजली व अन्य आवश्यक सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने की अपील की।

महबूबा ने ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल कई युवाओं के खिलाफ सार्वजनकि सुरक्षा कानून के तहत कथित रूप से दर्ज किये गये मामले और उन्हें जम्मू कश्मीर से बाहर की जेलों में रखे जाने की खबरों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाइयां “बेहद चिंताजनक हैं और इससे युवाओं में अलगाव की भावना और अधिक उत्पन्न होने का खतरा है।”

भाषा जितेंद्र अमित

अमित