मंगलुरू (कर्नाटक), 10 जनवरी (भाषा) पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. रघु मुर्थूगुड्डे ने समुद्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चेतावनी देते हुए शनिवार को कहा कि समुद्री प्रदूषण खतरनाक दर से बढ़ रहा है जिसमें सूक्ष्म प्लास्टिक, समुद्र के स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बनकर उभरा है।
शनिवार को यहां मंगलुरू साहित्य उत्सव में ‘नेत्रावती-नीलः स्थानीय नदियां, वैश्विक दांव’ विषय पर आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए मुर्थूगुड्डे ने कहा कि पोतों द्वारा भारी मात्रा में अपशिष्ट समुद्र में छोड़ा जा रहा है जिससे समुद्र में प्रदूषण काफी बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘समुद्री जीवन पर गंभीर असर पड़ा है। विशेष रूप से सूक्ष्म प्लास्टिक विविध पारिस्थितिकी समस्याएं पैदा कर रहे हैं और धीरे धीरे यह मछली के माध्यम से मानव खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि जहां वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक कचरे को घटाने के प्रयास किए जा रहे हैं, सूक्ष्म प्लास्टिक पर खास तौर पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के उपयोग पर एक हद तक रोक लगाई जा रही है, लेकिन सूक्ष्म प्लास्टिक पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल सख्त उपायों की जरूरत है।
समुद्र और नदियों की सभ्यताओं के ऐतिहासिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए उदयराज ने भारत की नेत्रावती नदी और मिस्र की नील नदी की तुलना की, जबकि इन दोनों के बीच व्यापक भौगोलिक दूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘शताब्दियों पूर्व, भारत और मिस्र के बीच व्यापार फला फूला। भारतीय मलमल का कपड़ा मिस्र को निर्यात किया गया जिससे पता चलता है कि आधुनिक परिवहन से काफी पहले कैसे जलमार्गों ने सभ्यताओं को जोड़ा।’’
वक्ताओं ने आज के समय में मौजूद पर्यावरण संबंधी चुनौतियां रेखांकित करते हुए कहा कि ये चुनौतियां देश की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं और स्थानीय पारिस्थितिकी नुकसान के वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।
भाषा सं राजेंद्र सिम्मी
सिम्मी