(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने मंगलवार को प्रवासन को आर्थिक आकांक्षाओं से प्रेरित एक वैश्विक परिघटना करार देते हुए उन राज्यों की पहचान, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया जहां यह प्रवृत्ति प्रचलित है।
उपराष्ट्रपति ने यहां उनसे मिलने आये पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के युवा प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से बातचीत के दौरान सतत पर्यटन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास की वकालत की।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्रवासन, सतत पर्यटन, आपदा से निपटने की क्षमता और खेल अवसंरचना से संबंधित प्रश्न पूछे।
पहाड़ी क्षेत्रों की जोखिम संभाव्यता का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने आपदा की तैयारी को बढ़ाने, बुनियादी ढांचे में सुधार करने और समन्वित प्रयासों के महत्व पर जोर दिया, जिसमें आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी पहल शामिल हैं।
उन्होंने दार्जिलिंग चाय की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी स्वीकार किया तथा मूल्यवर्धन एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया। खेलों के विषय में उन्होंने जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को निखारने के लिए एकीकृत बुनियादी ढांचे और संस्थागत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया।
राधाकृष्णन ने कहा कि युवा एक आत्मविश्वासी और प्रगतिशील भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक हैं।
भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को इसकी सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के लिए युवा नागरिकों को नवाचार, ईमानदारी और उद्यमशीलता के साथ योगदान देने की आवश्यकता है।
भाषा राजकुमार पवनेश
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