दिल्ली की 47 विधानसभा सीट पर 30-40 प्रतिशत से अधिक मतदाता मसौदा सूची से होंगे बाहर

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दिल्ली की 47 विधानसभा सीट पर 30-40 प्रतिशत से अधिक मतदाता मसौदा सूची से होंगे बाहर

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 07:41 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 07:41 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली की मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 70 में से 47 विधानसभा क्षेत्रों में 30 से 40 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली मसौदा मतदाता सूची से बाहर होंगे। शहर के निर्वाचन निकाय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में 20 से 40 प्रतिशत मतदाता मसौदा मतदाता सूची से बाहर होंगे।

ग्रेटर कैलाश (35 प्रतिशत), मालवीय नगर (38.64 प्रतिशत), नयी दिल्ली (41.76 प्रतिशत) और आरके पुरम (44.46 प्रतिशत) जैसे अपेक्षाकृत समृद्ध इलाकों वाले विधानसभा क्षेत्रों में मसौदा सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं का प्रतिशत अधिक है।

एसआईआर में 30 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को ‘‘प्रपत्र एकत्र नहीं हो सके’’ श्रेणी में रखा गया। इसका मतलब है कि या तो उन्होंने अपने प्रपत्र जमा नहीं किए, या वे पंजीकृत पते से स्थानांतरित हो चुके हैं, उनकी मृत्यु हो चुकी है अथवा वे दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता हैं।

आंकड़ों के अनुसार आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत समृद्ध राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 79.14 प्रतिशत मतदाता प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ है, जबकि ग्रामीण स्वरूप वाले तुगलकाबाद में यह आंकड़ा सबसे कम 52.15 प्रतिशत रहा। तुगलकाबाद में करीब 48 प्रतिशत मतदाता मसौदा सूची से बाहर रहेंगे।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियों, पुनर्वास क्षेत्रों तथा निम्न आय वाली घनी बस्तियों या झुग्गी-झोपड़ी वाले कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मसौदा सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं का प्रतिशत कम है।

किराड़ी में 68.98 प्रतिशत, सुल्तानपुर माजरा में 68.93 प्रतिशत और करावल नगर में 67.19 प्रतिशत मतदाता प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ है।

मंगोलपुरी, उत्तम नगर और सीलमपुर में भी 76 प्रतिशत से अधिक प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ है, जबकि बवाना, मादीपुर, नरेला और मटियाला में यह आंकड़ा 75 से 76 प्रतिशत के बीच है। इससे इन क्षेत्रों में मसौदा सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहने का संकेत मिलता है।

दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कई विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटलीकरण 60 प्रतिशत से कम रहा है। इनमें कस्तूरबा नगर (55.97 प्रतिशत), आरके पुरम (55.54 प्रतिशत) और ओखला (54.67 प्रतिशत) शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि इन क्षेत्रों में अधिक संख्या में मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से बाहर रह सकते हैं।

एसआईआर के तहत घर-घर जाकर सत्यापन का अभियान 30 जून को शुरू हुआ था और सोमवार को समाप्त हुआ। इसके तहत 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख से अधिक, यानी करीब एक-तिहाई, मतदाता मसौदा सूची से बाहर रह सकते हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जिन्होंने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए या जिन्हें ‘‘एएसडीडी’’ (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता) श्रेणी में रखा गया है।

दिल्ली में 30 जून से 17 अगस्त के बीच घर-घर सत्यापन के दौरान प्रत्येक मतदाता को बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए थे। करीब 67 प्रतिशत से अधिक प्रपत्र मतदाताओं ने बीएलओ के पास जमा किए, जिन्हें निर्वाचन आयोग के एसआईआर मोबाइल ऐप पर अपलोड कर डिजिटलीकृत किया गया।

विधानसभा क्षेत्रवार डिजिटलीकृत और एकत्र न हो सकने वाले प्रपत्रों के आंकड़ों के अनुसार, केवल रोहिणी (83.43 प्रतिशत) और शकूरबस्ती (81.26 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ। इसका अर्थ है कि इन दोनों क्षेत्रों में करीब 20 प्रतिशत मतदाता मसौदा सूची से बाहर रहेंगे।

कुल 13 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 40 से 50 प्रतिशत मतदाता मसौदा मतदाता सूची से बाहर रहेंगे, जबकि 34 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 30 से 40 प्रतिशत मतदाताओं के नाम मसौदा सूची में नहीं होंगे। इसके अलावा 21 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 20 से 30 प्रतिशत मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से बाहर रहने की संभावना है।

विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में डिजिटलीकृत प्रपत्रों और मसौदा सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं का मिश्रित रुझान सामने आया है। यह स्थिति दिल्ली के आर्थिक रूप से संपन्न और पिछड़े क्षेत्रों, पॉश कॉलोनियों के साथ-साथ झुग्गी-झोपड़ी, अनधिकृत और पुनर्वास कॉलोनियों में भी दिखाई देती है।

अनुपस्थित और स्थानांतरित श्रेणी में रखे गए मतदाता 24 अगस्त से शुरू होने वाले दावे और आपत्तियां दाखिल करने के चरण में आवेदन कर सकेंगे। आवेदन 23 सितंबर तक जमा किए जा सकेंगे।

बाहर किए गए मतदाताओं की ओर से दाखिल दावों और आपत्तियों का निपटारा निर्वाचन अधिकारियों द्वारा 24 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच किया जाएगा। इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।

इन आंकड़ों का महत्व खास तौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों में अधिक है जहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।

अल्पसंख्यक बहुल ओखला में करीब 45 प्रतिशत मतदाताओं के प्रपत्र ‘‘एकत्र नहीं हो सके’’, जिसका मतलब है कि उनके नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं होंगे।

ओखला को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में प्रपत्रों का डिजिटलीकरण अपेक्षाकृत अधिक हुआ और मसौदा सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं की संख्या कम रही।

सीलमपुर में मसौदा सूची से बाहर होने वाले मतदाताओं का प्रतिशत 23.37, मटिया महल में 24.5, बाबरपुर में 27, मुस्तफाबाद में 28, बल्लीमारान में 32.65 और चांदनी चौक में 38.98 प्रतिशत रहा।

वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा जीती गई 22 सीटों में सीलमपुर में सबसे अधिक 76.63 प्रतिशत प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हुआ। इसके बाद तिलक नगर (76.59 प्रतिशत), मटिया महल (75.50 प्रतिशत) और गोकलपुर (74.24 प्रतिशत) का स्थान रहा। आप के कब्जे वाली सीटों में तुगलकाबाद में डिजिटलीकरण सबसे कम 52.15 प्रतिशत रहा।

भाषा रवि कांत रवि कांत माधव

माधव