छत्रपति संभाजीनगर, 19 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के बागी छह सांसदों में एक ओमप्रकाश राजे निंबालकर ने शुक्रवार को कहा कि उनके पिता की हत्या के मामले में आने वाले फैसले का ‘मौजूदा राजनीतिक हालात’ से कोई संबंध नहीं है।
शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने दो दिन पहले दावा किया था कि धाराशिव के लोकसभा सदस्य निंबालकर को उनके पिता पवन राजे निंबालकर की 2006 में हुई हत्या से जुड़े मामले में उनके पक्ष में फैसला का वादा किया जा रहा है। इस मामले में फैसला 16 जून को आना था, लेकिन मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाने की तारीख 20 जून तक टाल दी।
ओमप्रकाश राजे निंबालकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘मेरे पिता की हत्या के मामले को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ने का कोई तुक नहीं है… अगर ऐसा होता, तो मैं जल्दी फैसले की उम्मीद में 2022 में ही सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गया होता।’’
पवन राजे निंबालकर हत्याकांड के आरोपियों में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के सौतेले भाई व राज्य के पूर्व मंत्री पदमसिंह पाटिल भी शामिल हैं।
निंबालकर से जब उनके भावी राजनीतिक कदम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘अभी मेरा ध्यान कल आने वाले फैसले पर है। इसके बाद मैं अपने चुनाव क्षेत्र में जाऊंगा और कोई भी फैसला लेने से पहले लोगों से बात करूंगा। कल मेरे और मेरे परिवार के लिए अहम दिन है, क्योंकि हमने न्याय के लिए 20 साल तक संघर्ष किया है।’’
उन्होंने कहा कि अदालत उसके सामने पेश किए गए तथ्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाएगी।
उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (उबाठा) को गत चार साल में दूसरी बड़ी बगावत का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
इन सांसदों में संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाखचौरे, नागेश पाटिल-अष्टिकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। इन सभी सांसदों ने बृहस्पतिवार को शिवसेना (उबाठा) की संसदीय दल की बैठक में भाग नहीं लिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने ठाकरे के नेतृत्व से दूरी बना ली है।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश