नगालैंड सरकार ने तेल खोज, भू-स्वामियों के अधिकार और बाढ़-भूस्खलन की स्थिति की समीक्षा की

नगालैंड सरकार ने तेल खोज, भू-स्वामियों के अधिकार और बाढ़-भूस्खलन की स्थिति की समीक्षा की

नगालैंड सरकार ने तेल खोज, भू-स्वामियों के अधिकार और बाढ़-भूस्खलन की स्थिति की समीक्षा की
Modified Date: August 10, 2026 / 04:26 pm IST
Published Date: August 10, 2026 4:26 pm IST

कोहिमा, 10 अगस्त (भाषा) नगालैंड सरकार ने तेल खोज, भू-स्वामियों के अधिकार, प्रस्तावित ‘फुटहिल रोड’ तथा बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के लिए राज्य की तैयारियों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की है। राज्य के मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अलोंग ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत में छह अगस्त को वोखा में हुई मंत्रिमंडल की बैठक को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

असम-नगालैंड सीमा पर तेल खोज के संबंध में अलोंग ने कहा कि सरकार भू-स्वामियों और अन्य प्रभावित पक्षों के अधिकारों एवं चिंताओं की रक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल का मानना है कि सभी चिंताओं का हरसंभव तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।’’

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब नागरिक समाज के संगठनों ने तेल खोज गतिविधियों को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित गांवों और अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श करने की मांग की है।

केंद्रीय नगालैंड जनजाति परिषद (सीएनटीसी) की ओर से उठाई गई चिंताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तेल खोज से प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों के हितधारकों को ध्यान में रखना होगा।

भारत सरकार, असम और नगालैंड के बीच 11 जून को नयी दिल्ली में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें असम-नगालैंड सीमा क्षेत्रों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन सहित खनिज तेल संबंधी गतिविधियों को सुगम बनाने का प्रावधान है।

‘फुटहिल रोड’ के संबंध में अलोंग ने कहा कि केंद्र सरकार और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सहित संबंधित पक्षों के साथ भी चर्चा की गई है।

उन्होंने प्रस्तावित सड़क की 30 मीटर, 18 मीटर और 12 मीटर चौड़ाई को लेकर जारी विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना नगालैंड के आर्थिक पुनरुत्थान के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है।

बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति के बारे में अलोंग ने कहा कि तत्काल प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘राजनीति एक अलग बात है,’’ और इस बात पर बल दिया कि सरकार की जिम्मेदारी लोगों को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करना है।

उन्होंने बताया कि नगालैंड के कई हिस्से भूस्खलन और मकानों के ढहने की घटनाओं से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं तथा इनमें जानमाल का नुकसान भी हुआ है। खराब मौसम के कारण शिक्षा व्यवस्था में आए व्यवधान का जिक्र करते हुए अलोंग ने कहा कि सामान्य स्थिति बहाल करने और शैक्षणिक सत्र पर इसके प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रकृति से नहीं लड़ सकते।’’ साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं के प्रभाव को कम करने के लिए बेहतर तैयारियों और उपायों की आवश्यकता है।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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