एनएपीए ने क्वेटा में ऐतिहासिक गुरुद्वारे को ध्वस्त किये जाने की निंदा की, मामले की जांच की मांग की

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एनएपीए ने क्वेटा में ऐतिहासिक गुरुद्वारे को ध्वस्त किये जाने की निंदा की, मामले की जांच की मांग की

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 03:57 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 03:57 PM IST

चंडीगढ़, 24 जुलाई (भाषा) ‘नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन’ (एनएपीए) ने बलूचिस्तान के क्वेटा में एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे को ढहाए जाने की खबरों की शुक्रवार को निंदा करते हुए इस मामले की तत्काल पारदर्शी जांच कराने की मांग की।

एनएपीए के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने कहा कि अगर यह खबर सच निकलती है, तो यह ध्वस्तीकरण धार्मिक आजादी का गंभीर उल्लंघन तथा सिख समुदाय की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर हमला होगा।

उन्होंने पाकिस्तान और बलूचिस्तान की सरकारों से अपील की कि जब तक स्वतंत्र जांच से सच्चाई का पता चल न जाए तबतक वे उस जगह पर किसी भी तरह का निर्माण न होने दें।

चहल ने कहा, ‘‘सिख समुदाय के धार्मिक स्थल सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि वे आस्था, इतिहास और पहचान के प्रतीक हैं। ऐसी विरासत को मिटाने या नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश से गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं और इसपर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि अगर किसी भी तरह के कानूनी उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अल्पसंख्यक समुदायों के उपासना-स्थलों की सुरक्षा कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों के अनुसार की जानी चाहिए।

चहल ने पाकिस्तान के केंद्रीय और प्रांतीय प्रशासनों से यह भी अपील की कि वे देश के संविधान के तहत सिखों समेत सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों की समान सुरक्षा सुनिश्चित करें और भावी पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को संरक्षित करें।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली संस्थाओं से अपील की कि वे स्थिति पर नज़र रखें तथा एक निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी समाधान को प्रोत्साहित करें।

एनएपीए ने क्वेटा के सिख समुदाय के साथ एकजुटता प्रकट की और दुनिया भर में सिखों की धार्मिक विरासत की सुरक्षा एवं अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की वकालत करने के अपने संकल्प को दोहराया।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश