नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि धन की हेराफेरी से जुड़े वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में अपराध की प्रकृति प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के साथ विश्व स्तर पर बदल रही है और सरकार को ‘सभी पहलुओं’ से निपटना होगा।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी ने याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे कथित धोखाधड़ी के मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
कथित धोखाधड़ी के चलते 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के सार्वजनिक धन का गबन हुआ था। गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ) ने मामले की जांच की थी।
यह उल्लेख करते हुए कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद 14 महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं, अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी। इसने कहा कि 92 आरोपियों में से 50 से अधिक को या तो जमानत मिल गई है या उन्हें सुरक्षात्मक आदेश मिल गए हैं।
पीठ ने कहा, ‘अगर 14 महीने तक आरोप तय नहीं किए जाते…क्या हम इसके लिए किसी को सलाखों के पीछे रख सकते हैं?’ इसने कहा कि आरोपी जमानत का हकदार है।
दलीलों के दौरान, एसएफआईओ की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि आरोप 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के सार्वजनिक धन की हेराफेरी से संबंधित हैं।
न्यायमूर्ति कौल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि दुनिया भर में प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है। समस्या यह है कि कुछ लोग प्रौद्योगिकी के मामले में राज्य से आगे हैं। इसलिए, इन अपराधों की प्रकृति बदल रही है। आपके पक्ष को इसे नियंत्रित करना होगा।’
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य तकनीकी प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”इन सभी पहलुओं से निपटना होगा।”
राजू ने अदालत को बताया कि बड़ी संख्या में आरोपी और उनके द्वारा दायर कई आवेदन आरोप तय करने की प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।
पीठ ने कहा, ”हमारे विचार में, यह निचली अदालत द्वारा नियंत्रित किया जाने वाला एक पहलू है।”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि कभी-कभी किसी मामले में आरोपमुक्त करने या जमानत लेने के लिए अविश्वसनीय दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।
यह उल्लेख करते हुए कि याचिकाकर्ता जमानत का हकदार है, पीठ ने कहा कि अन्य शर्तों के अलावा, वह अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करेगा और दो जमानतदारों में से एक उसका ‘रक्त संबंधी’ होगा।
भाषा नेत्रपाल पवनेश
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