वाजपेयी, मनमोहन सिंह के दौर वाली बातचीत की परंपरा को फिर से शुरू करने की जरूरत: मीरवाइज

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वाजपेयी, मनमोहन सिंह के दौर वाली बातचीत की परंपरा को फिर से शुरू करने की जरूरत: मीरवाइज

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  • Publish Date - July 6, 2026 / 06:04 PM IST,
    Updated On - July 6, 2026 / 06:04 PM IST

श्रीनगर, छह जुलाई (भाषा) कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने सोमवार को भारत-पाकिस्तान वार्ता बहाल करने के लिए नागरिक संस्थाओं की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करते हुए कहा कि नयी विश्व व्यवस्था में युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

अमरनाथ यात्रा के बारे में मीरवाइज ने कहा कि कश्मीर में मेहमाननवाजी की पुरानी परंपरा रही है और जो तीर्थयात्री अपनी आस्था के कारण यहां आते हैं, उनके साथ सम्मान के साथ पेश आना चाहिए और उनकी देखभाल की जानी चाहिए।

मीरवाइज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष हैं। अलगाववादी संगठनों के इस गठबंधन के कई घटक संगठनों पर केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हुर्रियत कॉन्फ्रेंस अब लगभग निष्क्रिय हो चुकी है।

यहां एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में मीरवाइज ने कहा, ‘‘जब एक नयी विश्व व्यवस्था आकार ले रही है, तब यह स्पष्ट है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। हम भारत, पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर की नागरिक संस्थाओं की उन आवाजों का स्वागत करते हैं, जो दोनों देशों के बीच शांति और संवाद को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं।’’

मीरवाइज से भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक जाने माने नागरिकों द्वारा लिखे गए उस खुले पत्र के बारे में पूछा गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती सहित कई हस्ताक्षरकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से द्विपक्षीय वार्ता और दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध बहाल करने का आग्रह किया है।

मीरवाइज ने कहा कि उन्होंने बातचीत का समर्थन तब भी किया ‘‘जब बातचीत की पैरवी करने वालों पर देशद्रोह का आरोप लगाया जाता था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम पीछे नहीं हटे। मेरे चाचा ‘शहीद’ मौलवी मुश्ताक की हत्या कर दी गई, इस्लामिया स्कूल जला दिया गया, मेरे घर पर हमला हुआ, लेकिन तब भी मैंने अपने इस सिद्धांत को नहीं छोड़ा कि बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।’’

मीरवाइज ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान बातचीत की जो परंपरा रही है, उसे फिर से शुरू करने और आगे बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने जोर दिया कि ‘‘शांति, सम्मान और न्यायपूर्ण समाधान के लिए दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच, तथा उतनी ही महत्वपूर्ण रूप से दिल्ली और श्रीनगर के बीच सार्थक संवाद बेहद आवश्यक है।’’

स्कूल पुस्तकालयों में वितरित की गई दो पुस्तकों पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के संबंध में पूछे गए एक सवाल पर मीरवाइज ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में प्रतिबंध कारगर नहीं होते, चाहे वे पुस्तकों पर लगाए जाएं, विचारों पर या फिर किसी संगठन पर।

भाषा आशीष माधव

माधव