भुवनेश्वर, 28 मार्च (भाषा) पुरी स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखी वस्तुओं की सूची तैयार करने का अगला चरण आठ अप्रैल से शुरू होकर अगले तीन दिनों तक चलेगा। ओडिशा के विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शनिवार को यह जानकारी दी।
हरिचंदन ने संवाददाताओं से कहा कि बहार भंडार (बाहरी कक्ष) की सूची तैयार करने के अगले चरण की तैयारी पूरी हो चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस अवधि के दौरान, देवी-देवताओं के आभूषणों और कीमती वस्तुओं की गिनती, वजन और डिजिटल रूप से दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिसमें 3डी मैपिंग का इस्तेमाल भी शामिल है।’’
ओडिशा के तटीय शहर पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के इस मंदिर का प्रशासन राज्य के विधि विभाग की देखरेख में संचालित होता है।
बाहरी कक्ष में प्रमुख त्योहारों के दौरान उपयोग किए जाने वाले आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं रखी जाती हैं जिसमें देवताओं का ‘सुना बेसा’ (स्वर्ण वस्त्र)भी शामिल है। ये वस्त्र देवताओं को रथ यात्रा सहित साल में कुल पांच बार पहनाए जाते हैं।
हरिचंदन ने कहा कि ‘चलंती’ रत्न भंडार (दैनिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त आभूषण) में रखे गए चल खजाने के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से की 3डी मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के जरिये दस्तावेजीकरण 25 मार्च को पहले चरण के पहले दिन किया गया था।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंदा पाढ़ी ने कहा कि 48 वर्षों के अंतराल के बाद रत्न भंडार की वस्तुओं की गणना की जा रही है और इनमें रखी वस्तुओं की तीन श्रेणियां बनाई गई हैं।
रत्न भंडार का भीतरी कक्ष, जहां मंदिर के सबसे मूल्यवान आभूषण सदियों से संरक्षित हैं, पहली श्रेणी के अंतर्गत आता है।
त्योहारों के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले आभूषणों को दूसरी श्रेणी में रखा जाता है और बाहरी कक्ष में संग्रहित किया जाता है, जबकि दैनिक उपयोग के आभूषणों को तीसरी श्रेणी में सूचीबद्ध किया जाता है।
भाषा धीरज संतोष
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