नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को ग्रेटर नोएडा में कुछ निर्माणाधीन परियोजनाओं पर पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के कारण काम बंद करने का आदेश जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखने के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण मानकों के कथित उल्लंघन से जुड़े निर्माण कार्यों के मामले की सुनवाई कर रही थी।
ये परियोजनाएं पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना का उल्लंघन करते हुए और जहां आवश्यक था वहां उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की स्थापना संबंधी सहमति (सीटीई) तथा संचालन सहमति (सीटीओ) लिए बिना चलाई जा रही हैं।
यह याचिका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पूर्व नगर पार्षद राजेंद्र त्यागी ने दायर की है।
त्यागी की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने पक्ष रखा।
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) ने सुनवाई के दौरान अधिकरण को बताया कि प्राधिकरण पर्यावरण मानकों के कथित उल्लंघन के साथ किए जा रहे निर्माण कार्यों की पड़ताल कर रही है।
प्राधिकरण ने ऐसे निर्माण कार्यों की पहचान करते हुए विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया।
अधिवक्ता वशिष्ठ ने 25 मार्च को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दाखिल हलफनामे का हवाला दिया, जिसमें पांच निर्माणाधीन परियोजनाओं की पहचान की गई थी।
उन्होंने दावा किया कि ग्रेटर नोएडा के छपरौला गांव में एम/एस गाजियाबाद एंड डेवलपर्स बिल्डर्स, भगवती डेवलपर्स द्वारा द्वारका सिटी कॉलोनी या समटेल एन्क्लेव तथा ग्रेटर नोएडा में जीटी रोड के किनारे एम/एस सहारा एन्क्लेव/सिटी में काम बंद करने के आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी है।
अधिकरण ने 23 जुलाई के आदेश में कहा, “बोर्ड यह सत्यापित और सुनिश्चित करे कि काम बंद करने के आदेश के प्रभावी रहने के दौरान इन परियोजनाओं में आदेश का उल्लंघन करते हुए कोई निर्माण कार्य न हो। इस संबंध में बोर्ड चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करे।”
मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
भाषा जितेंद्र नेत्रपाल
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