नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग को धनराशि अंतरित करने में अत्यधिक देरी को लेकर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
आदेशों का पालन न करने के लिए ‘निराधार बहाने बनाने’ की ‘व्यापक प्रवृति’ की निंदा करते हुए एनजीटी ने कहा कि राशि के अंतरण में देरी के कारण ‘अस्वीकार्य’ हैं।
नवंबर 2023 में, अधिकरण ने डीपीसीसी को निर्देश दिया कि वह यहां निलोठी गांव की चार अवैध पत्थर पेराई इकाइयों से पर्यावरण मुआवजे के रूप में एकत्र किए गए आठ लाख रुपये वन और वन्यजीव विभाग को जारी करे।
दिल्ली सरकार के इस विभाग को निर्देश दिया गया था कि वह इस धनराशि का उपयोग गांव में वृक्षारोपण के लिए करे।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने आठ जनवरी के एक आदेश में डीपीसीसी के इस कथन पर ध्यान दिया कि देरी उसके कार्यालय के स्थानांतरण के कारण हुई थी।
पीठ ने कहा, ‘‘डीपीसीसी द्वारा वन एवं वन्यजीव विभाग, जीएनसीटीडी को राशि हस्तांतरण में एक वर्ष से अधिक की देरी के लिए दिए गए कारण पूरी तरह से अतार्किक और अस्वीकार्य हैं।’’
एनजीटी ने कहा कि उसके आदेश का पालन न करना एक अपराध है जिसके लिए डीपीसीसी अध्यक्ष और सदस्य सचिव पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है।
उसने कहा, ‘‘लेकिन हम नरम रुख अपनाते हुए इस तरह के मुकदमे का निर्देश देना उचित नहीं समझते। फिर भी, इस अधिकरण द्वारा पारित आदेशों का पालन न करने और इसके लिए निराधार बहाने बनाने की व्यापक प्रवृत्ति को रोकने के लिए, हम डीपीसीसी पर उचित जुर्माना लगाना आवश्यक समझते हैं।’’
उसने डीपीसीसी को उसके आदेश का पालन नहीं करने को लेकर 50000 रुपये का जुर्माना भरने को कहा। यह आदेश मंगलवार को सार्वजनिक किया गया।
भाषा राजकुमार माधव
माधव