नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में तटीय कटाव रोकने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने हेतु तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, साथ ही इस बात पर जोर दिया है कि तदर्थ या अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।
अधिकरण ने राज्य के पर्यावरण विभाग की उस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया जिसमें कहा गया है कि ‘गंगा के जलोढ़ डेल्टा के तटीय क्षेत्रों में तीव्र कटाव हो रहा है’। इसने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि सुंदरबन ने ‘1969 और 2019 के बीच सामूहिक रूप से 250 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि खो दी है’।
न्यायाधिकरण सुंदरबन तट (विशेष रूप से घोरामारा द्वीप) पर हो रहे कटाव और आसपास के मैंग्रोव वन के संरक्षण के मुद्दे से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रहा था।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 17 फरवरी को जारी एक आदेश में राज्य सरकार के पर्यावरण विभाग, जीएसआई और पश्चिम बंगाल तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दायर जवाबों पर गौर किया।
कुछ ‘तदर्थ उपायों’ पर आपत्ति जताते हुए अधिकरण ने कहा कि इनसे लंबे समय में सार्थक परिणाम नहीं मिलेंगे और इसलिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
इसने वन महानिदेशक, राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय के एक प्रतिनिधि को मिलाकर एक संयुक्त समिति का गठन किया।
अधिकरण ने कहा, ‘संयुक्त समिति सभी प्रासंगिक तथ्यों को एकत्र करेगी और इस मूल आवेदन में विचाराधीन क्षेत्रों में मैंग्रोव वन के संरक्षण के लिए एक व्यापक योजना तैयार करेगी। यह उस क्षेत्र में तटीय कटाव से बचाव और मैंग्रोव क्षेत्र को और बढ़ाने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों का भी सुझाव देगी।’
इसमें कहा गया है कि समिति छह महीने के भीतर यह कार्य पूरा करके रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट में योजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार एजेंसियों और समयसीमा का उल्लेख करना होगा।
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शुभम वैभव
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