कोल्लम(केरल), 19 फरवरी (भाषा) केरल की कोल्लम स्थित एक अदालत ने शबरिमला मंदिर के तंत्री (प्रधान पुजारी) कंदारारु राजीवरु को जमानत देते हुए कहा कि मंदिर की कलाकृतियों से कथित तौर पर सोने की चोरी से संबंधित मामलों में उनके खिलाफ ‘‘लेशमात्र भी सबूत’’ नहीं है।
राजीवरु मंदिर के द्वारपाल (संरक्षक देवता) पर मढ़ी गई सोने की परत की चोरी से संबंधित एक मामले में 16वें आरोपी हैं और श्रीकोविल (गर्भगृह) की चौखट से सोने की कथित चोरी से संबंधित एक अन्य मामले में 13वें आरोपी हैं।
कोल्लम सतर्कता न्यायालय के न्यायाधीश मोहित सी एस ने बुधवार को दोनों मामलों में तंत्री को जमानत दे दी।
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अदालत में दलील दी कि तंत्री ने 18 जून, 2019 को सोने की कलाकृतियों पर चढ़ाई गई सोने की परत के मरम्मत कार्य को लेकर अपनी राय दी थी, जो इस मामले में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत देती है।
अदालत ने हालांकि इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि तंत्री द्वारा व्यक्त की गई राय पूरी घटना का ‘आधार’ थी और जमानत याचिकाओं में दी गई दलीलों को प्रथम दृष्टया स्थापित करती हैं।
अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, यहां तक कि एसआईटी की ओर से भी कोई सबूत नहीं है, जिससे याचिकाकर्ता की कथित अनियमितताओं में किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित हो सके। आपराधिक साजिश के संबंध में एसआईटी का मामला इस तथ्य के कारण विफल हो जाता है कि याचिकाकर्ता ने 20 जुलाई, 2019 और 18 मई, 2019 के महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।’’
अदालत ने कहा कि यदि आरोप के अनुसार कोई साजिश हुई होती, तो तंत्री दोनों महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक होता।
अदालत ने कहा, ‘‘इसके अलावा, 19 जुलाई, 2019 के पहले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना मात्र, अन्य किसी भी दोषी ठहराने वाली परिस्थितियों की अनुपस्थिति में, इस स्तर पर याचिकाकर्ता को दोषी ठहराने का आधार नहीं है, खासकर इसलिए क्योंकि प्रस्ताव बोर्ड के एक औपचारिक निर्णय के अनुसार तैयार किया गया था।’’
अदालत ने कहा कि उक्त कलाकृतियां अनुष्ठान से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं थीं और गर्भगृह के पवित्र आंतरिक परिसर के बाहर स्थित थीं।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसके अलावा, देवस्वओम नियमावली के तहत, याचिकाकर्ता केवल बोर्ड द्वारा मांगे जाने पर ही राय देने के लिए बाध्य है, और तंत्री के रूप में उसके कर्तव्य केवल पूजा, समारोह और धार्मिक प्रथाओं तक ही सीमित हैं।’’
अदालत ने कहा कि कि कलाकृतियों की मरम्मत और रखरखाव में तंत्री की कोई भूमिका नहीं थी, जिसकी जिम्मेदारी त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के उच्चस्तरीय अधिकारियों की थी।
न्यायाधीश ने शबरिमला स्थित अय्यप्पा मंदिर के तंत्री की सीमित भूमिका, चिकित्सा कारणों और केरल के एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल के प्रधान पुजारी के रूप में उनके धार्मिक दायित्वों का संज्ञान लेते हुए उन्हें जमानत दे दी।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत