पार्थिव शरीर कब आएगा इसकी कोई जानकारी नहीं: यूक्रेन तट पर मारे गए नाविक के परिजन

पार्थिव शरीर कब आएगा इसकी कोई जानकारी नहीं: यूक्रेन तट पर मारे गए नाविक के परिजन

पार्थिव शरीर कब आएगा इसकी कोई जानकारी नहीं: यूक्रेन तट पर मारे गए नाविक के परिजन
Modified Date: July 21, 2026 / 12:40 pm IST
Published Date: July 21, 2026 12:40 pm IST

कासरगोड (केरल), 21 जुलाई (भाषा) यूक्रेन के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर कथित रूसी हमले में मारे गए केरल के 26 वर्षीय नाविक अखिल जोयन के परिजनों ने मंगलवार को कहा कि उन्हें अब तक इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उसका पार्थिव शरीर स्वदेश कब लाया जाएगा।

अखिल जोयन मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। वह उन 10 लोगों में शामिल थे, जिनकी रविवार को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना होने के कुछ ही समय बाद गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर कथित रूसी हमले में मौत हो गई थी।

अखिल के पिता जोयन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उनके बेटे को रोजगार देने वाली कंपनी ने उन्हें बताया था कि जहाज पर रूसी मिसाइल से हमला हुआ है और अखिल लापता है।

उन्होंने कहा, ‘‘कंपनी ने बताया था कि विस्तृत जानकारी मिलने पर वह मुझे सूचित करेगी। दोपहर तक कोई सूचना नहीं मिलने पर मैंने दोबारा फोन किया तो बताया गया कि हमले में मारे गए दो लोगों के शवों की पहचान हो गई है और उनमें एक अखिल का है।’’

जोयन ने कहा कि इसके बाद कंपनी की ओर से कोई और सूचना नहीं मिली।

उन्होंने बताया कि उन्होंने एक मित्र के माध्यम से कासरगोड के सांसद राजमोहन उन्नीथन से भी संपर्क कर बेटे के पार्थिव शरीर को शीघ्र स्वदेश लाने में मदद करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि अब तक कंपनी ने यह नहीं बताया है कि पार्थिव शरीर कब भारत भेजा जाएगा।

जोयन ने बताया कि राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने उन्हें फोन कर आश्वासन दिया है कि अखिल का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द स्वदेश लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अखिल एक महीने से अधिक समय पहले अपनी शादी तय होने के बाद केरल से वापस काम पर गए थे। उनकी शादी अप्रैल 2027 में होने थी।

जोयन ने बताया कि रविवार शाम अखिल ने उन्हें एक फोन कॉल किया था लेकिन वह कॉल नहीं उठा पाए। जब परिवार ने वापस फोन कॉल किया तो उनका मोबाइल बंद था।

उन्होंने कहा, ‘‘वह अक्सर फोन करता था। वह एक घंटी के बाद कॉल काट देता था और फिर हम उसे वापस फोन करते थे।’’

भाषा

मनीषा खारी

खारी


लेखक के बारे में