नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत किसी राज्य पर हिंदी समेत कोई भी भाषा नहीं थोप रही।
चौधरी ने लोकसभा में प्रश्नकाल में द्रमुक सांसद कलानिधि वीरास्वामी के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह बात कही।
तमिलनाडु के सदस्य ने उनके राज्य का समग्र शिक्षा अभियान के तहत बकाया धन जारी नहीं किये जाने का मुद्दा उठाते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत तीन भाषा के फार्मूले को लेकर चिंता जताई।
चौधरी ने अपने उत्तर में कहा, ‘‘एनईपी में स्पष्ट रूप से छात्रों को बहुभाषाएं सिखाने से उनके शिक्षण पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख है। सभी राज्यों को स्कूलों में तीन भाषाओं को सिखाने का ढांचा बनाना चाहिए। कम से कम 15 साल तक के बच्चों को विशेष रूप से दो भाषाओं में दक्षता होनी चाहिए जो मातृभाषा हों। तीसरी भाषा पूरी तरह मांग पर आधारित है।’’
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में केंद्र सरकार समग्र शिक्षा अभियान 2.0 के तहत राज्यों को शिक्षकों की नियुक्ति आदि में मदद करती है।
तमिलनाडु में तीन भाषाओं के फार्मूले को लागू करने पर द्रमुक सांसद की चिंता पर चौधरी ने कहा, ‘‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि एनईपी 2020 में कहीं भी हिंदी समेत किसी भाषा को थोपने की बात नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि जनगणना 2011 के ‘भाषा एटलस’ के अनुसार तमिलनाडु में 96 भारतीय भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं।
चौधरी ने कहा कि एनईपी में तीन भाषाओं में दो मातृभाषाओं को सिखाने की बात है।
उन्होंने कहा कि तीन भाषाओं को लागू करने की बात भी दो भाषाओं के फार्मूले, जिसे द्रमुक भी तमिलनाडु में स्वीकार करती है, के साथ ही लागू है। शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि इसमें लचीलापन है।
उन्होंने यह दावा भी किया कि तमिलनाडु ने मार्च 2024 में पीएमश्री योजना पर समझौता करने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्होंने अभी तक यह करार नहीं किया है।
इस पर द्रमुक के कुछ सदस्यों को आपत्ति जताते सुना गया।
चौधरी ने कहा, ‘‘अगर आप राष्ट्रीय शिक्षा नीति से सहमत हैं तो आपको पीएमश्री योजना भी लागू करनी चाहिए। इसे देश में 14 हजार से अधिक स्कूलों के लिए डिजाइन किया गया है। तमिलनाडु में इसे लागू नहीं किए जाने से वहां के छात्र अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।’’
उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत तमिलनाडु को 538 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं और आगे के अनुदान की प्राप्ति के लिए राज्य को प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
भाषा वैभव मनीषा
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