एसआईआर का विरोध नहीं लेकिन निर्वाचन आयोग कांग्रेस की आपत्तियों का समाधान करे : प्रियंक खरगे

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एसआईआर का विरोध नहीं लेकिन निर्वाचन आयोग कांग्रेस की आपत्तियों का समाधान करे : प्रियंक खरगे

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  • Publish Date - June 29, 2026 / 04:10 PM IST,
    Updated On - June 29, 2026 / 04:10 PM IST

बेंगलुरु, 29 जून (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ नहीं है, लेकिन निर्वाचन आयोग को कांग्रेस की आपत्तियों का पहले समाधान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना मतदाताओं के नाम सूची से हटाये नहीं जाने चाहिए।

कर्नाटक में एसआईआर की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होगी।

प्रियंक खरगे ने सोमवार को बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के सामने आठ आपत्तियां रखी हैं। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने से पहले ‘तार्किक विसंगति’, कानूनी नोटिस, मौखिक आदेश और न्यायाधिकरण तक पहुंच जैसे मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि एसआईआर नहीं होना चाहिए। मतदाता सूची में सुधार आवश्यक है और यह निर्वाचन आयोग का अधिकार है। इससे भी जरूरी बात यह है कि त्रृटि रहित और सही मतदाता सूची उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है।’’

प्रियंक ने कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला।

उन्होंने कहा, ‘‘आप (निर्वाचन आयोग) किसी व्यक्ति को सिर्फ वर्तनी में गलती की वजह से मतदान करने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते।’’

मंत्री ने कहा कि पार्टी चाहती है कि निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले उसके सवालों का जवाब दे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपना जन-जागरुकता अभियान जारी रखेगी और साथ ही कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेगी।

प्रियंक ने एसआईआर प्रक्रिया में कृत्रिम मेधा के कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सॉफ्टवेयर का ऑडिट किसने किया और यह कैसे काम करता है।

उन्होंने विभिन्न स्थानों पर करीब 89 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रभावित मतदाताओं को न्यायाधिकरण में जाने का मौका नहीं दिया गया।

प्रियंक ने बेंगलुरु के नदजदी बिदादी में एआई टाउनशिप के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण को लेकर जारी विवाद पर कहा कि किसी भी किसान को अपनी जमीन छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी किसानों को अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। हमने कभी ऐसा करने की कोशिश नहीं की और न ही कभी करेंगे।’’

राज्य की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कल्याणा कर्नाटक इलाके के पिछड़ेपन को लेकर कांग्रेस सरकार की आलोचना की है। प्रियंक ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने इस इलाके के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जबकि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने नाममात्र का निवेश किया।

केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)के स्थान पर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ शुरू किया है। इसे कर्नाटक में लागू करने के सवाल पर प्रियंक ने केंद्र पर आरोप लगाया कि उसने बिना किसी परामर्श के योजना का 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ असंवैधानिक रूप से राज्यों पर डाल दिया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रही है।

भाषा धीरज वैभव

वैभव