बीजिंग, 29 जून (भाषा) चीन में भारत के राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने सोमवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच व्यापार और वाणिज्यिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में बताया कि राजदूत दुरईस्वामी ने चीन के वाणिज्य मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक वांग लिपिंग से मुलाकात की।
पोस्ट में कहा गया, ‘‘उन्होंने द्विपक्षीय बातचीत के तरीकों सहित व्यापार और वाणिज्यिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया और आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। वे संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए।’’
वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए टकराव के बाद दोनों देश अभी अपने संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया में हैं। उस टकराव के कारण उनके संबंध ठप हो गए थे।
फिलहाल, दोनों देशों ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा, वीजा, उड़ानों और उच्च-स्तरीय बातचीत की प्रक्रिया को फिर से शुरू कर दिया है।
व्यापार और वाणिज्य भारत-चीन संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में चीन, अमेरिका को पीछे छोड़ता हुआ, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.66 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर का हो गया, जबकि आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर का हो गया।
व्यापार घाटा वर्ष 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर के मुकाबले वर्ष 2025-26 में बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
भारत कई वर्षों से मांग कर रहा है कि चीन अपने आईटी, फार्मा और कृषि क्षेत्रों को खोले, जो भारत के मजबूत क्षेत्र हैं।
दुरईस्वामी की लिपिंग के साथ बैठक से व्यापार और वाणिज्य से जुड़े मुद्दों पर भारत-चीन बातचीत में तेजी आने की उम्मीद है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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