नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) सरकार ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि उसके पास छोटे और सीमांत किसानों के ऋण को एक बार में माफ करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि मुश्किल में फंसे कर्जदारों को राहत देने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने 28 नवंबर, 2025 को संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान पर दिशानिर्देश, 2025 जारी किया जिसे एक जुलाई, 2026 को अद्यतन किया गया।
यह निर्देश ऋणदाताओं को अपने बोर्ड से मंज़ूर नीतियों और नियामक दिशानिर्देश के आधार पर तनावग्रस्त कर्जदारों के ऋण के वित्तीय पुनर्गठन की छूट देता है।
उन्होंने सवाल के लिखित जवाब में कहा, ‘‘केंद्र सरकार के पास अभी छोटे और सीमांत किसानों के ऋण को एक बार में माफ करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।’’
यह सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार छोटे और सीमांत किसानों के कर्ज को एक बार में माफ करने या उसका पुनर्गठन करने पर विचार करने का प्रस्ताव रखती है।
एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में चौधरी ने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें में ‘फील्ड ट्रायल’ के लिए 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर बैंकनोट पेश करने और ‘फील्ड ट्रायल’ सफल होने के बाद इन दो मूल्य वर्गों (डिनोमिनेशन) में पॉलीमर बैंकनोटों को नियमित रूप से जारी करने की बात कही गई थी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
चौधरी ने कहा कि आरबीआई ने जानकारी दी थी कि अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, पॉलीमर बैंकनोटों की उम्र कागज के बैंकनोटों की तुलना में काफी ज्यादा होती है।
उन्होंने कहा कि पॉलीमर बैंकनोट लाने का काम अभी शुरुआती चरण में है और डिजिटल भुगतान पर इनका क्या असर होगा, यह इन नोटों के नियमित रूप से जारी होने के बाद ही पता चल पाएगा।
भाषा वैभव हक
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